April 19, 2026 1:54 pm

फाल्गुन अमावस्या पर साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज, भारत में नहीं दिखेगा ‘रिंग ऑफ फायर’ का अद्भुत नज़ारा

जेडी बैरागी वैष्णव- शुभदर्शन TV न्यूज़ चैनल—आर्यवर्त की भूमि भारतवर्ष मे आज 17 फरवरी 2026, मंगलवार को फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि पर साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) है, जिसे आम भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। खगोलीय दृष्टि से यह बेहद आकर्षक घटना मानी जाती है, हालांकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा।

आज 17 फरवरी 2026 सूर्य ग्रहण का समय
भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा —
ग्रहण आरंभ : दोपहर 3:26 बजे
पूर्ण (वलयाकार) चरण : शाम 5:13 बजे से 6:11 बजे तक (लगभग 58 मिनट)
ग्रहण का मध्यकाल : शाम 5:42 बजे
ग्रहण समाप्त (मोक्ष) : शाम 7:57 बजे
कुल अवधि : लगभग 4 घंटे 31 मिनट
इस दौरान सूर्य आंशिक रूप से ढका रहेगा, जबकि मध्य चरण में सूर्य के चारों ओर आग की अंगूठी जैसा दृश्य दिखाई देगा।
क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण?
जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है तो सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है। लेकिन यदि उस समय चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर होता है, तो वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। ऐसी स्थिति में सूर्य का मध्य भाग ढक जाता है और किनारे चमकते रहते हैं। इससे सूर्य के चारों ओर एक चमकदार वलय बन जाता है, जो अग्नि की अंगूठी जैसा दिखाई देता है। इसी कारण इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
 क्या भारत में दिखाई देगा ग्रहण?
आज का यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
ग्रहण का मुख्य दृश्य दक्षिणी गोलार्ध में देखने को मिलेगा। विशेष रूप से:
Antarctica
South Africa
Chile
Argentina
इन क्षेत्रों में वलयाकार सूर्य ग्रहण स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में इसका कोई प्रत्यक्ष खगोलीय प्रभाव नहीं रहेगा।
 क्या सूतक काल मान्य होगा?
धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है।
इस आधार पर:
सूतक काल का प्रारंभ — रात्रि 3:26 बजे (भारतीय समयानुसार)
लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि जो ग्रहण जिस देश में दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल मान्य नहीं होता।
इसलिए भारत में:
मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे
पूजा-पाठ सामान्य रूप से जारी रहेगा
किसी प्रकार का धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होगा
 किस राशि में लगेगा ग्रहण?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि में लगेगा। वर्तमान में सूर्य का गोचर कुंभ राशि में है और राहु भी इसी राशि में स्थित है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग कुछ राशियों पर विशेष प्रभाव डाल सकता है।
2026 में अगला ग्रहण कब?
3 मार्च 2026 — चंद्र ग्रहण (भारत में दिखाई देगा)
12 अगस्त 2026 — अगला सूर्य ग्रहण (भारत में नहीं दिखेगा)
निष्कर्ष- फाल्गुन अमावस्या पर लगने वाला यह साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण खगोलीय रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भले ही भारत में इसका दृश्य नहीं मिलेगा, लेकिन विश्व के कई देशों में ‘रिंग ऑफ फायर’ का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। भारत में सूतक मान्य नहीं होने से धार्मिक गतिविधियां सामान्य रहेंगी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

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