रतलाम के जावरा में महाविद्यालय परिसर स्थित सुभाष स्कूल भवन को महिला एवं बाल विकास विभाग को आवंटित किए जाने का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। विद्यार्थियों के पूर्व विरोध, एसडीएम कार्यालय के घेराव और प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है। हालात यह हैं कि प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट निर्णय और लिखित आदेश जारी नहीं होने के बीच महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा पिछले दो दिनों से सुभाष स्कूल भवन में बैठकर अपने विभाग का संचालन किया जा रहा है। इससे महाविद्यालय के विद्यार्थियों और छात्र नेताओं में नाराजगी बढ़ गई।
मामले की जानकारी छात्र नेता जितेंद्र यादव को मिलने के बाद उन्होंने महाविद्यालय के विद्यार्थियों और साथी कार्यकर्ताओं के साथ महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना शुरू कर दिया। आक्रोशित विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के गेट पर ताला लगाकर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। देखते ही देखते महाविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई और विद्यार्थियों ने भवन आवंटन को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

पहले भी किया था एसडीएम कार्यालय का घेराव, फिर भी नहीं निकला समाधान
विद्यार्थियों का कहना है कि सुभाष स्कूल भवन महाविद्यालय परिसर से संबंधित है और इसके उपयोग को लेकर छात्रों की आपत्तियों को पहले भी प्रशासन के सामने उठाया जा चुका है। इस संबंध में विद्यार्थियों द्वारा एसडीएम कार्यालय का घेराव तक किया गया था। उस दौरान भी प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस और लिखित निर्णय सामने नहीं आया।
छात्रों का आरोप है कि जब तक भवन आवंटन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी, तब तक विभागीय अधिकारियों द्वारा भवन में अपना कार्यालय संचालित करना शुरू कर देना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विद्यार्थियों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन देकर उनकी मांगों को टालने की कोशिश की जा रही है।
घंटों चला धरना, पुलिस और महाविद्यालय प्रशासन को करना पड़ा हस्तक्षेप
महाविद्यालय गेट पर छात्रों का धरना घंटों तक जारी रहा। इस दौरान पुलिस प्रशासन और महाविद्यालय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्र नेताओं से चर्चा कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। छात्र नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक भवन को लेकर प्रशासन की ओर से लिखित आदेश नहीं लाया जाता, तब तक केवल मौखिक आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
काफी देर तक चली बातचीत के बाद महाविद्यालय प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि महाविद्यालय के अधिकारी जिलाधीश से चर्चा करेंगे और भवन को महिला एवं बाल विकास विभाग को अस्थायी रूप से कुछ महीनों के लिए दिए जाने संबंधी लिखित आदेश लेकर आएंगे।
प्रशासन की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया कि संबंधित विभाग का स्वयं का भवन बनकर तैयार होने के बाद सुभाष स्कूल भवन पुनः महाविद्यालय प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।
लिखित आदेश नहीं आया तो होगा उग्र आंदोलन
छात्र नेता जितेंद्र यादव एवं अन्य विद्यार्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि इस बार केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त जरूर किया जा रहा है, लेकिन इसे प्रशासन की मांगों की स्वीकृति नहीं माना जाए। विद्यार्थियों की मांग है कि भवन के अस्थायी आवंटन की अवधि, शर्तें और विभाग द्वारा भवन खाली कर महाविद्यालय को वापस सौंपने की समय-सीमा लिखित आदेश में स्पष्ट होनी चाहिए।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अपने आश्वासन के अनुरूप जिलाधीश से लिखित आदेश लेकर नहीं आता और निर्धारित समय में भवन वापस महाविद्यालय को सौंपने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करता है, तो विद्यार्थियों द्वारा इससे भी उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसकी समस्त जवाबदारी महाविद्यालय प्रशासन एवं नगरीय प्रशासन की होगी।
ताला खुला, धरना समाप्त; अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अधिकारियों से चर्चा और लिखित आदेश लाने के आश्वासन के बाद विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर लगाया गया ताला खोल दिया और अपना धरना समाप्त कर दिया। हालांकि धरना समाप्त होने के बावजूद भवन आवंटन का विवाद समाप्त नहीं हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन वास्तव में विद्यार्थियों को दिए गए आश्वासन पर अमल करेगा या एक बार फिर मामला केवल मौखिक भरोसे तक सीमित रह जाएगा? विद्यार्थियों की निगाहें अब जिलाधीश के लिखित आदेश और महाविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
फिलहाल सुभाष स्कूल भवन को लेकर छात्रों का आक्रोश प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बन गया है। यदि समय रहते पारदर्शी निर्णय नहीं लिया गया तो यह विवाद आने वाले दिनों में बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले सकता है।
