अर्जुन सिंह डोडिया ताल—रतलाम जिले के आलोट विकासखंड के ग्राम सुंदरपुर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संवेदनशीलता सिर्फ शब्द नहीं, कर्म से दिखती है।
मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत गांव में ऐसा काम हुआ, जिसने व्यवस्था पर सवाल भी खड़े कर दिए और समाज को आईना भी दिखा दिया।
भीषण गर्मी में जहां इंसान खुद पानी के लिए जूझ रहा है, वहीं नवांकुर संस्था दुधावती सेवा समिति और ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति सुंदरपुरा ने बेज़ुबान पशु-पक्षियों के लिए पानी के सकोरे रखकर एक बड़ा संदेश दिया — “अगर सरकार और सिस्टम सो रहा है, तो समाज जाग रहा है!”
ग्रामीणों और समिति के सदस्यों ने मिलकर जल संरक्षण का बिगुल फूंका और यह साबित किया कि जीव दया ही सबसे बड़ा धर्म है।
इस पहल में अमर सिंह झाला, मिथिलेश जोशी, शैलेंद्र सिंह डोडिया, सीताराम चौहान सहित कई जागरूक ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही।
सवाल ये है कि जब एक छोटा सा गांव इतनी बड़ी सोच दिखा सकता है, तो जिम्मेदार तंत्र क्यों पीछे है?
क्या हर जगह ऐसे प्रयास नहीं होने चाहिए?
सुंदरपुर की यह पहल सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सिस्टम को झकझोरने वाली चेतावनी है — अब वक्त है जागने का!