रतलाम जिले के पिपलौदा थाना क्षेत्र के ग्राम कंचनखेड़ी में जनवरी 2024 में हुए बहुचर्चित नाथूलाल चौधरी हत्याकांड में जावरा न्यायालय ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश जंगबहादुर सिंह राजपूत की अदालत ने मामले में 8 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने सभी दोषियों पर अलग-अलग अर्थदंड भी लगाया। कुल मिलाकर 2 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
दोषियों में सुरेश जाट पिता भंवरलाल जाट, राहुल जाट, कपिल जाट, सुभाष जाट, विकास जाट, बलराम जाट, अवतार सिंह जाट और विक्रम जाट शामिल हैं। सभी ग्राम कंचनखेड़ी थाना पिपलौदा के निवासी बताए गए हैं।
पुरानी रंजिश बनी खूनी हमले की वजह
अभियोजन के अनुसार 24 जनवरी 2024 को नाथूलाल चौधरी खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पुरानी रंजिश को लेकर आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया।
अभियोजन के मुताबिक हमले में लोहे की टामियों, पाइप, लाठी और डंडों का इस्तेमाल किया गया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि नाथूलाल चौधरी के हाथ-पैर, उंगलियों सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।
शोर सुनकर फरियादी विकास चौधरी और जितेंद्र जाट मौके पर पहुंचे तो नाथूलाल गंभीर रूप से घायल हालत में मिले।
जावरा से रतलाम तक चला इलाज, नहीं बच सकी जान
गंभीर रूप से घायल नाथूलाल चौधरी को तत्काल सिविल अस्पताल जावरा ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज रतलाम रेफर किया गया।
लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
इसके बाद पिपलौदा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने धारा 302, 307, 147 और 120-बी भादवि के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया।
अदालत में साक्ष्य टिके, 8 आरोपियों को उम्रकैद
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से दस्तावेजी, लिखित और मेडिकल साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी आठ आरोपियों को दोषी माना।
न्यायालय ने धारा 302/149 भादवि के तहत प्रत्येक आरोपी को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
इसके साथ ही धारा 148 भादवि के तहत प्रत्येक आरोपी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
इस तरह सभी आठ आरोपियों पर कुल 2 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
कोर्ट के फैसले से साफ संदेश—हिंसा का अंजाम जेल
नाथूलाल चौधरी हत्याकांड में आया यह फैसला उन लोगों के लिए भी कड़ा संदेश है जो पुरानी रंजिश को हिंसा में बदलने से पीछे नहीं हटते।
एक विवाद ने आखिरकार एक व्यक्ति की जान ले ली और अब अदालत के फैसले के बाद आठ दोषियों को अपना लंबा समय जेल में बिताना होगा।
रंजिश का जवाब हथियार नहीं, कानून है—और कानून के सामने आखिरकार जवाब देना ही पड़ता है।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी
मामले में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी विजय कुमार पारस एवं विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार छारी ने प्रभावी पैरवी की।
विवेचना उनि. के.एल. दायमा एवं उनि. लोकेन्द्र सिंह डावर द्वारा की गई थी।
मामले को शासन द्वारा चिन्हित श्रेणी में रखा गया था।
कंचनखेड़ी हत्याकांड में न्यायालय का बड़ा संदेश
करीब ढाई साल पहले हुई इस वारदात का न्यायिक फैसला अब सामने आया है। अदालत द्वारा आठ आरोपियों को दोषी मानकर आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने से यह स्पष्ट है कि गंभीर आपराधिक मामलों में मजबूत साक्ष्य और प्रभावी पैरवी के आधार पर न्यायालय सख्त फैसला दे सकता है।
नाथूलाल चौधरी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अदालत का फैसला उनके परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
