रतलाम जिले में सरकारी दफ्तरों में निरीक्षण अक्सर फाइलों और रिपोर्टों तक सीमित दिखाई देता है, लेकिन रतलाम में सोमवार को कलेक्टर अजय कटेसरिया का निरीक्षण कुछ अलग अंदाज में नजर आया। तहसील कार्यालय के अभिलेखागार में पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच करने पहुंचे कलेक्टर खुद जमीन पर बैठ गए और वर्षों पुराने दस्तावेजों की एक-एक पंजी को करीब से खंगाला।
कलेक्टर ने सिर्फ रिकॉर्ड की अलमारी खुलवाकर औपचारिक निरीक्षण नहीं किया, बल्कि 1956-57 के पुराने नक्शों, मिसल रिकॉर्ड, खसरा रिकॉर्ड, नामांतरण पंजी, रीनंबरिंग अभिलेख और बंदोबस्त रिकॉर्ड तक की स्थिति को बारीकी से देखा।
70 साल पुराने रिकॉर्ड… कलेक्टर ने पूछा—रिकॉर्ड में कोई विसंगति तो नहीं?
पुराने राजस्व दस्तावेजों का महत्व समझते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों से रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी की स्थिति के बारे में जानकारी ली। अलग-अलग वर्षों के दस्तावेजों में दर्ज विवरण, उनके संधारण और रिकॉर्ड की निरंतरता को लेकर भी अधिकारियों से सवाल किए गए।
उन्होंने यह भी जानने का प्रयास किया कि पुराने रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और बाद के रिकॉर्ड में कहीं कोई भिन्नता, विसंगति अथवा संधारण संबंधी समस्या तो नहीं है।
राजस्व रिकॉर्ड में एक छोटी सी गलती भी जमीन से जुड़े विवाद को वर्षों तक जन्म दे सकती है। ऐसे में पुराने रिकॉर्ड की सुरक्षा और उनकी प्रमाणिकता को लेकर कलेक्टर का यह निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिर्फ नक्शे और पंजी नहीं… पूरा अभिलेखागार जांचा
कलेक्टर ने तहसील कार्यालय शहर और तहसील कार्यालय ग्रामीण स्थित अभिलेखागार का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न तहसीलों से संबंधित मिसल रिकॉर्ड, अपराध पंजी, लेखा रिकॉर्ड और पुराने न्यायालयीन प्रकरणों से जुड़े अभिलेखों की स्थिति भी देखी।
इसके अलावा हल्का स्तर पर संधारित किए जाने वाले रिकॉर्ड के बारे में भी अधिकारियों से जानकारी ली गई।
यानी निरीक्षण केवल पुराने नक्शों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजस्व विभाग में रिकॉर्ड के रख-रखाव से लेकर उनकी उपलब्धता और संधारण की पूरी व्यवस्था को परखा गया।
जमीन विवादों में सबसे अहम होते हैं पुराने रिकॉर्ड
राजस्व विभाग के पुराने नक्शे, मिसल, खसरा, नामांतरण और बंदोबस्त रिकॉर्ड जमीन के स्वामित्व और पुराने अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। यही वजह है कि इनके सुरक्षित और व्यवस्थित रख-रखाव को लेकर कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पुराने राजस्व अभिलेख अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। इनकी प्रामाणिकता बनाए रखने के साथ सुरक्षित और व्यवस्थित संधारण किया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध हो सके।
लापरवाही मिली तो नहीं चलेगा!
कलेक्टर ने अभिलेखागार में किसी भी तरह की अव्यवस्था या लापरवाही की गुंजाइश नहीं रखने के निर्देश दिए। पुराने दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और जरूरत के समय रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
कलेक्टर का जमीन पर बैठकर पुराने रिकॉर्ड खंगालने का अंदाज इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की स्थिति सीधे तौर पर आम नागरिकों के अधिकारों और जमीन संबंधी विवादों से जुड़ी होती है।
अब असली सवाल—क्या पुराने रिकॉर्ड की स्थिति की नियमित होगी समीक्षा?
कलेक्टर के इस निरीक्षण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब तहसील स्तर पर दशकों पुराने राजस्व रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा और डिजिटल सुरक्षा की दिशा में भी ठोस कदम उठेंगे?
क्योंकि 70 साल पुराने नक्शे और पंजी केवल कागज नहीं, बल्कि जमीन के इतिहास का दस्तावेज हैं। इन रिकॉर्डों में किसी भी तरह की क्षति, छेड़छाड़, गुम होना या गलत संधारण भविष्य में गंभीर विवादों का कारण बन सकता है।
निरीक्षण के दौरान सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन सहित संबंधित राजस्व अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
रतलाम प्रशासन के इस निरीक्षण ने एक बात साफ कर दी है—पुरानी फाइलें अब सिर्फ अलमारियों में धूल खाने के लिए नहीं हैं, बल्कि उनके हर पन्ने की अपनी प्रशासनिक और कानूनी अहमियत है।
