November 5, 2026 11:48 am

धार्मिक नगरी में शराबबंदी का दावा, फिर भी गली-गली अवैध शराब,थाने से चंद कदम दूर सट्टा और शराब के आरोप, बस स्टैंड क्षेत्र में भी कारोबार की शिकायतें, कलेक्टर की कार्रवाई ने पुलिस-आबकारी व्यवस्था पर खड़े किए सवाल

धर्मेन्द्र कुमार, मंदसौर-मुख्यमंत्री द्वारा मंदसौर को धार्मिक नगरी घोषित किए जाने के बाद शहर में शराब बिक्री पर प्रतिबंध लागू है। लाइसेंसधारी शराब दुकानों को शहर से बाहर किए जाने के बावजूद यदि शहर की गलियों में अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह शराब शहर में पहुंच कैसे रही है और जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां है?

एक तरफ मंदसौर पुलिस डोडाचूरा और ड्रग्स जैसी नशीली सामग्री की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई कर अपनी सक्रियता दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर शहर में खुलेआम अवैध शराब बिकने की शिकायतें पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही हैं। धार्मिक नगरी में शराबबंदी के बावजूद यदि अवैध शराब का कारोबार पैर पसार रहा है तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि उस प्रतिबंध की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्न है।

थाने से कुछ दूरी पर ही सट्टे और शराब के आरोप

शहर में अवैध गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया है। पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में थाना क्षेत्र से कुछ दूरी पर सट्टा कारोबार चलने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि कालाखेत क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं।

सवाल यह है कि यदि ये गतिविधियां वास्तव में चल रही हैं तो पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग और मुखबिर तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल रही? और यदि जानकारी मिल रही है तो कार्रवाई में देरी क्यों?

नवीन बस स्टैंड भी सवालों के घेरे में

नवीन बस स्टैंड क्षेत्र में भी अवैध गतिविधियों की शिकायतें चर्चा में हैं। बस स्टैंड के आसपास पुलिस से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यालय और थाने मौजूद होने के बावजूद बसों की आड़ में अवैध शराब बिक्री तथा यात्री प्रतीक्षालय में सट्टा चलने के आरोप सामने आना गंभीर विषय है।

यदि इन आरोपों में तथ्य है तो यह व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल है कि पुलिस और संबंधित विभागों की मौजूदगी के बावजूद अवैध कारोबार करने वालों को कार्रवाई का डर क्यों नहीं दिखाई दे रहा?

लाइसेंसी दुकानें बंद, फिर शराब आई कहां से?

शराबबंदी के बाद लाइसेंसधारी दुकानों पर प्रतिबंध और कार्रवाई के बावजूद यदि शहर में शराब उपलब्ध है तो जांच का सबसे अहम बिंदु यही होना चाहिए कि शराब की आपूर्ति का स्रोत क्या है?

क्या शराब दूसरे राज्यों या आसपास के क्षेत्रों से लाई जा रही है? क्या प्रतिबंधित अवधि में किसी पुराने स्टॉक का अवैध इस्तेमाल हो रहा है? या फिर लाइसेंसधारी दुकानों से जुड़े किसी नेटवर्क की भूमिका है?

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकता है, लेकिन इतना तय है कि अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए केवल छोटी-मोटी कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। सप्लाई चेन तक पहुंचना जरूरी होगा।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे तो कलेक्टर ने संभाली कमान

लगातार मिल रही शिकायतों के बीच कलेक्टर दिव्यांक सिंह के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने शहर के अलग-अलग चार स्थानों पर अवैध शराब बिक्री की जांच की। कार्रवाई के दौरान एक स्थान पर अवैध शराब बिक्री का मामला सामने आने पर आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि शिकायतों को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।

शहर एसडीएम शुभम पाटीदार के अनुसार, मंदसौर धार्मिक नगरी होने के कारण शहर में शराब की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद शराब बिक्री की सूचनाएं लगातार प्राप्त हो रही थीं, जिसके बाद जांच और कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि नई आबकारी नीति के तहत जांच निरंतर जारी रहेगी तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल कार्रवाई का नहीं, कार्रवाई की निरंतरता का है

एक स्थान पर कार्रवाई के बाद असली परीक्षा अब यह है कि क्या अवैध शराब के पूरे नेटवर्क तक प्रशासन पहुंच पाएगा? क्या शराब बेचने वाले छोटे विक्रेताओं के साथ-साथ कथित सप्लायर और मुख्य स्रोतों तक जांच पहुंचेगी?

धार्मिक नगरी में शराबबंदी केवल सरकारी आदेश और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि शहर में कहीं अवैध शराब बिक रही है तो जिम्मेदार विभागों को यह पता लगाना होगा कि शराब कहां से आ रही है, कौन पहुंचा रहा है और किस नेटवर्क के जरिए बिक्री हो रही है।

मंदसौर की जनता अब यह सवाल पूछ रही है—जब शहर में शराब की बिक्री प्रतिबंधित है तो फिर गलियों तक शराब पहुंच कौन रहा है?

और इससे भी बड़ा सवाल—क्या प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ एक-दो मामलों तक सीमित रहेगी या अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर उसे खत्म किया जाएगा?

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