November 5, 2026 11:49 am

मिठाई खाने के बाद मासूम आर्यन की मौत से मचा हड़कंप! आखिर खाद्य सुरक्षा विभाग कब जागेगा?

 रतलाम के जावरा समीप गांव बिनोली में त्योहारों  की रौनक और मिठाइयों की मिठास के बीच एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और आमजन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जावरा विधानसभा क्षेत्र के बिनोली निवासी जितेंद्र गोस्वामी के महज ढाई वर्षीय मासूम पुत्र आर्यन की मौत ने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों के अनुसार, मिठाई खाने के बाद परिवार की तबीयत बिगड़ गई। उपचार के दौरान मंदसौर के शासकीय चिकित्सालय में मासूम आर्यन ने दम तोड़ दिया, जबकि उसके माता-पिता अस्पताल में उपचाररत हैं।

आखिर मासूम की मौत के बाद कौन लेगा जवाबदेही?

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी और निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी कितनी प्रभावी है? क्या मिठाइयों की नियमित जांच की जा रही है, या कार्रवाई केवल शिकायतों और घटनाओं के बाद ही होती है?

फिलहाल, मिठाई खाने और परिवार की तबीयत बिगड़ने के बीच संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में सबसे जरूरी है कि प्रशासन बिना किसी दबाव के पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और वास्तविक कारणों का खुलासा करे।

जावरा में पहले भी उठ चुके हैं सवाल, अब कार्रवाई का इंतजार क्यों?

जावरा क्षेत्र में पहले भी कथित नकली दूध के कारोबार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब मासूम की मौत और परिवार के बीमार होने की घटना ने दूध, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग बाजारों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की जांच के लिए कितनी गंभीरता से काम कर रहा है?

यदि खाद्य पदार्थों में मिलावट या दूषण पाया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जो दूसरों के लिए भी सख्त संदेश बने। आम नागरिकों को अपने परिवार और बच्चों के लिए खरीदे जाने वाले खाद्य पदार्थों की सुरक्षा को लेकर आशंकित नहीं रहना चाहिए।

त्योहारों से पहले बाजारों की जांच जरूरी

त्योहारों का समय नजदीक है। इस दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। यदि समय रहते बाजारों में सघन जांच नहीं की गई, तो आमजन की सेहत को लेकर चिंताएं और गंभीर हो सकती हैं।

प्रशासन को चाहिए कि मिठाई दुकानों, दूध विक्रेताओं और खाद्य पदार्थों के निर्माण एवं भंडारण स्थलों की जांच की जाए। संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराई जाए तथा रिपोर्ट के आधार पर तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए।

प्रशासन के सामने पांच बड़े सवाल

  1. मासूम आर्यन की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए क्या निष्पक्ष जांच शुरू की गई है?
  2. जिस मिठाई को खाने के बाद परिवार की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है, क्या उसके नमूने लेकर जांच कराई जाएगी?
  3. संबंधित दुकान और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति से जुड़े लोगों की जांच कब होगी?
  4. जावरा विधानसभा क्षेत्र में दूध, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की सघन जांच के लिए विशेष अभियान कब शुरू होगा?
  5. त्योहारों के दौरान मिलावट और दूषित खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए प्रशासन की ठोस कार्ययोजना क्या है?

मांग स्पष्ट है—जांच हो, सच्चाई सामने आए और दोषियों पर कार्रवाई हो

इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कराई जाए। संबंधित मिठाई दुकान सहित आवश्यक स्थानों से खाद्य नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला में जांच हो। यदि किसी प्रकार की मिलावट, दूषण या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

साथ ही, जावरा विधानसभा क्षेत्र में दूध, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाए। जांच और कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक की जाए, ताकि जनता का भरोसा कायम रह सके।

एक ढाई वर्षीय मासूम की जिंदगी का कोई मोल नहीं लगाया जा सकता। इस दुखद घटना में शोक व्यक्त करना जरूरी है, लेकिन उसके साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि मामले की सच्चाई सामने आए और भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।

अब जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी। आमजन की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।।

जनता का सवाल एक ही है—खाद्य सुरक्षा के दावे कब जमीन पर उतरेंगे और आम आदमी को सुरक्षित भोजन कब मिलेगा?

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