जेडी बैरागी वैष्णव, शुभदर्शन TV न्यूज़ चैनल—कहावत है — “वृक्षों के कटने का किस्सा यूँ मशहूर न होता, अगर कुल्हाड़ी के पीछे लकड़ी का हिस्सा न होता।” आज यह कहावत रतलाम जिले की पत्रकारिता हालात पर बिल्कुल सटीक बैठती नजर आ रही है। पिछले कुछ दिनों से जिले के एक क्षेत्र से जुड़ी खबर को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। संबंधित समाचार एक पत्रकार द्वारा तथ्यों के आधार पर प्रकाशित किया गया था। बाद में कुछ लोगों द्वारा उसे गलत सिद्ध करने के लिए आवेदन और शिकायतें की गईं। मामला जांच और साक्ष्यों का विषय है — और सत्य जांच से ही सामने आएगा। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पत्रकारिता के नाम पर खुद को “ब्रांड” बताने वाले कुछ तथाकथित लोग पर्दे के पीछे सक्रिय होकर न सिर्फ खबर को गलत बताने का प्रयास कर रहे हैं, बल्कि संबंधित थाना और पुलिस चौकी तक फोन कर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह है कि यदि खबर गलत है, तो कानून और साक्ष्य अपना काम करेंगे — फिर इस तरह की बेचैनी क्यों?
“उंगली उठाने से पहले गिरेबान में झांकें”
जो 4-5 लोग घर मे बैठकर नैतिकता और सिद्धांतों का पाठ पढ़ा रहे हैं, क्या उन्होंने अपने अतीत पर कभी नजर डाली है? क्या उनके कार्यकाल में सब कुछ निष्कलंक था? क्या कभी उनके नाम विवादों में नहीं आए? किसी पर उंगली उठाना आसान है, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि एक उंगली सामने होती है तो तीन उंगलियां खुद की ओर भी इशारा करती हैं।
संगठन के नाम पर निजी एजेंडा?
चर्चा यह भी है कि कुछ लोग सामाजिक और निजी संगठनों के कार्यक्रमों में जाकर स्वयं को प्रभावशाली साबित करने की कोशिश में लगे हैं। लेकिन संगठन व्यक्ति से बड़ा होता है — और किसी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से उसकी गरिमा कम नहीं होती।
पत्रकारिता कोई दलाली का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जवाबदेही का दायित्व है। यदि कोई व्यक्ति खबरों को प्रभावित करने या दबाने का प्रयास करता है, तो यह सीधे-सीधे पत्रकारिता की आत्मा पर प्रहार है।
जांच से डर कैसा?
यदि खबर असत्य है, तो जांच में स्पष्ट हो जाएगा।
यदि सत्य है, तो सामने आ जाएगा।
दबाव, फोन कॉल और बंद कमरों की रणनीति सत्य को नहीं रोक सकती।
चेतावनी नहीं, स्पष्ट संदेश
जिले में पत्रकारिता और सामाजिक संगठनों की एक लंबी परंपरा रही है। व्यक्तिगत रंजिशों और समूह बाजी से उसे कमजोर करने की कोशिश किसी के हित में नहीं है। यदि भविष्य में भी इस तरह की गतिविधियां जारी रहीं, तो संबंधित तथ्यों के साथ जिले भर के नामों को सार्वजनिक करना “शुभदर्शन TV न्यूज़ चैनल” की मजबूरी बन सकता है। सत्य को दबाने की कोशिशें अस्थायी हो सकती हैं, लेकिन सत्य की आवाज स्थायी होती है। जो बराबरी नही कर सकता वह केवल बुराई करता है, आज उसके सामने कल इसके सामने, लेकिन वह यह क्यो भूल जाता है कि अगर वह किसी को उंगली से बता रहा है तो बाकी उंगलियां उसी की और इशारा कर रही है। वह यह क्यो भूल जाता है कि हमने हमारे दौर में क्या किया ? क्या हम जेल गए, क्या हमारे चेक बाउंस हुए। उसने तो इतना घिनोना काम किया कि उसकी पत्नी तक को सप्लाई कर दिया और वह 4 से 5 लोगो के साथ बैठकर ज्ञान दे रहा है कि उसको कैसे निपटाया जाए। कुछ दिनों से सामाजिक व निजी संगठनों कार्यक्रमों में भी अपनी तूती बजाते फिरते है। हम ब्रांड है काएके ब्रांड कोई ब्रांड नही हो तुम, केवल दलाल हो दलाल, और दलाली करते हो कभी खबरों पर तो कभी कुछ, लेकिन वह बहुत बड़ी गलती कर रहे है। लेकिन इन हरामियों द्वारा यहां तक कि सम्बंधित थाना पुलिस चौकी में काल करके बोल रहे है साहब बहुत तेज चलता है। अरे हरामियों की औलादों इतना तो शर्म कर लेते की वह तुम्हारे संगठन का ही व्यक्ति है। यहां तक कि रतलाम से भी कुछ कुत्ते भोंक रहे थे लेकिन वह पहले अपने गिरेबान में देख ले, अन्यथा अच्छा नही होगा। न तो तुम ये प्रमाणित कर सकते हो कि कौन क्या है। कौन है कौन नही है। यह स्वयं उसकी संस्था प्रमाणित करती है। इसलिए यही अच्छा होगा सब के लिए, क्योंकि इसमें संगठित नही दिखते है। और अगर अब कुछ सुनने में आया तो और भी पर्दे नाम सहित उजागर करने पड़ सकते है।

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