जेडी बैरागी वैष्णव, शुभदर्शन TV न्यूज़ चैनल-–मध्यप्रदेश के नीमच जिले में एक पत्रकार ने प्रशासनिक कार्रवाई से आहत होकर आत्महत्या की आशंका जताते हुए एक भावुक पत्र जारी किया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पत्रकार ने अपनी संभावित मौत के लिए स्थानीय विधायक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। नीमच निवासी पत्रकार मूलचंद खींची ने आरोप लगाया है कि उन्हें एक खबर प्रकाशित करने के बाद प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और इस दौरान दैनिकसमाचार पत्रों जैसे अखबारों के साथ कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे वर्ष 2015 से अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म दशपुर लाइव का संचालन कर रहे हैं।
पत्रकार मूलचंद खींची का कहना है कि उन्होंने हाल ही में नीमच–महू हाईवे पर बने एक पेट्रोल पंप को लेकर खबर प्रकाशित की थी। उनके अनुसार यह पेट्रोल पंप एक आदिवासी परिवार की जमीन पर बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जमीन से संबंधित एग्रीमेंट 14 दिसंबर 2020 को विधायक के बेटे यशराज और बेटी हर्षला के नाम से हुआ और मात्र सात दिनों के भीतर 23 दिसंबर 2020 को कलेक्टर द्वारा अनुमति जारी कर दी गई। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री, लोकायुक्त और अन्य विभागों में शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसके अलावा 28 फरवरी और 1 मार्च 2026 को इस संबंध में खबरें भी प्रकाशित की गईं। पत्रकार का आरोप है कि इस मामले की जांच करने के बजाय प्रशासन ने उनके खिलाफ ही कार्रवाई शुरू कर दी। उनके अनुसार 6 मार्च 2026 को उन्हें नीमच कलेक्टर कार्यालय की ओर से जिलाबदर संबंधी नोटिस जारी किया गया। अगले दिन 7 मार्च को सिटी थाना प्रभारी पुष्पा चौहान पुलिस बल के साथ उनके कार्यालय पहुंचकर नोटिस सौंपा।
मूलचंद खींची का कहना है कि इस कार्रवाई से वे मानसिक रूप से काफी आहत हैं और उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कई वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कहीं से भी संतोषजनक सुनवाई नहीं हुई। पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है या वे आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं, तो इसके लिए नीमच विधायक दिलीपसिंह परिहार, उज्जैन रेंज के एडीजी राकेश कुमार गुप्ता तथा रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल जिम्मेदार होंगे।
हालांकि इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों या विधायक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मामले ने खड़े किए कई सवाल
यह घटना कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है—
क्या पत्रकार द्वारा प्रकाशित खबर के कारण प्रशासनिक कार्रवाई हुई?
पेट्रोल पंप की अनुमति प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई या नहीं?
जिलाबदर की कार्रवाई किन आधारों पर की जा रही है?
इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।

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