November 5, 2026 11:31 am

छोटे से गांव मखला का बेटा बना मिसाल NEET में 531 अंक लाकर जयवर्धन बने गांव के पहले MBBS डॉक्टर बनने की राह पर

रतलाम में सफलता बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती। यदि मेहनत करने का जज्बा, लक्ष्य के प्रति समर्पण और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो छोटे से गांव से निकला युवा भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। ऐसा ही उदाहरण नागदा शहर के समीप पालकी से आगे स्थित छोटे से गांव मखला के होनहार बेटे जयवर्धन सिंह राठौड़, पिता जीवन सिंह राठौड़ ने पेश किया है।

करीब 400 से 500 की आबादी वाले मखला गांव के जयवर्धन ने री-NEET 2026 में 531 अंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि जयवर्धन मखला गांव के पहले विद्यार्थी हैं, जो MBBS डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इंदौर में नहीं मिली सफलता, लेकिन हौसला नहीं टूटा

12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद जयवर्धन ने NEET की बेहतर तैयारी के लिए इंदौर के एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया था। हालांकि अपेक्षित मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण NEET-2025 में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और वे सफलता हासिल नहीं कर सके।

असफलता का असर उनके आत्मविश्वास पर भी पड़ा, लेकिन परिवार ने हार मानने के बजाय फिर से तैयारी शुरू करने का फैसला लिया। इस बार बड़े शहर की बजाय परिवार ने अपने आसपास ऐसे संस्थान की तलाश की, जहां पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन और बेहतर वातावरण मिल सके।

रतलाम में मिला नया मार्गदर्शन

इसी तलाश के दौरान जयवर्धन ने रतलाम की कई कोचिंग संस्थाओं का दौरा किया। डेमो क्लास और अध्ययन वातावरण देखने के बाद उन्होंने अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट, रतलाम में प्रवेश लिया।

यहां उन्होंने पूरे एक वर्ष अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ अपनी तैयारी की। शिक्षकों के मार्गदर्शन में कमजोर विषयों पर काम किया और अपनी तैयारी को नए तरीके से आगे बढ़ाया।

पहली परीक्षा के बाद लगा सपना टूट जाएगा

जयवर्धन की परीक्षा यात्रा भी आसान नहीं रही। 3 मई को आयोजित पहली NEET परीक्षा में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन परीक्षा निरस्त होने की घटना ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया।

एक बार फिर उनके सामने अनिश्चितता खड़ी हो गई। इतने लंबे समय की मेहनत के बाद परीक्षा दोबारा होने की स्थिति ने उनका मनोबल प्रभावित किया। उन्हें डर था कि कहीं उनका डॉक्टर बनने का सपना अधूरा न रह जाए।

ऐसे समय में अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने उनका मनोबल बढ़ाया और निराशा छोड़कर दोबारा पूरी ताकत से तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।

री-NEET में मेहनत ने दिखाया रंग

इसके बाद जयवर्धन ने परीक्षा को चुनौती के रूप में लिया और दोबारा तैयारी में जुट गए। 21 जून को आयोजित री-NEET परीक्षा के बाद उन्हें भरोसा था कि इस बार उनका प्रदर्शन बेहतर रहा है।

जब परिणाम घोषित हुआ तो उनकी मेहनत रंग लाई। जयवर्धन ने 531 अंक हासिल किए और MBBS डॉक्टर बनने की दिशा में अपना कदम मजबूत कर लिया।

गांव में खुशी, परिवार को बेटे पर गर्व

परिणाम सामने आने के बाद मखला गांव में खुशी का माहौल है। परिवार के लोगों और ग्रामीणों ने जयवर्धन की सफलता पर खुशी जताई।

जयवर्धन के बड़े पिताजी ने बताया कि वह मखला गांव के पहले विद्यार्थी हैं, जो MBBS डॉक्टर बनने जा रहे हैं। उनके मुताबिक यह उपलब्धि सिर्फ परिवार की नहीं बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है।

छोटे गांव के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा

जयवर्धन की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने एक असफलता के बाद अपने सपने को छोड़ने के बजाय दोबारा शुरुआत की। बड़े शहर में अपेक्षित सफलता नहीं मिली तो उन्होंने अपने क्षेत्र में बेहतर मार्गदर्शन तलाशा और लगातार मेहनत करते हुए लक्ष्य हासिल किया।

अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने कहा कि विद्यार्थी की मंजिल उसके शहर से नहीं बल्कि उसकी मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से तय होती है। जयवर्धन ने साबित किया है कि छोटे गांवों के विद्यार्थी भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा करने का सामर्थ्य रखते हैं।

असफलता अंत नहीं, नई शुरुआत है

जयवर्धन सिंह राठौड़ की सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए संदेश है जो एक बार असफल होने के बाद अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। इंदौर में असफलता, परीक्षा निरस्त होने की परेशानी और मानसिक दबाव के बावजूद जयवर्धन ने हार नहीं मानी।

मखला जैसे छोटे गांव से निकलकर MBBS डॉक्टर बनने की राह पर पहुंचे जयवर्धन ने साबित कर दिया कि मंजिल शहर देखकर नहीं, मेहनत देखकर मिलती है।

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