November 5, 2026 11:43 am

रतलाम कलेक्टर, EOW SP उज्जैन सहित उच्च शिक्षा विभाग कटघरे में, हाईकोर्ट का हंटर चलना तय।

जेडी बैरागी वैष्णव, शुभदर्शन TV न्यूज़ चैनल—रतलाम जिले के जावरा में शिक्षा माफिया का करोड़ों का खेल! कागजों में कॉलेज चलाकर हड़पी छात्रवृत्ति, जांच में दोषी फिर भी कार्रवाई शून्य – आखिर किसका संरक्षण?  शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक स्कूल संचालक ने कागजों में कॉलेज संचालित दिखाकर शासन की करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति राशि हड़प ली। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के बाद हुई आधिकारिक जांच में मामला सही पाया गया, फिर भी आज तक संबंधित संचालक पर कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया।
RTI से खुला खेल
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब एक जागरूक RTI कार्यकर्ता ने AICTE भोपाल और CBSE नई दिल्ली में सूचना का अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत किए। प्राप्त दस्तावेजों में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई जावरा में जिस कॉलेज के नाम पर छात्रवृत्ति निकाली जा रही थी, उसकी वैधानिक मान्यता और संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
दस्तावेजों के अनुसार:
कॉलेज का संचालन केवल कागजों में दर्शाया गया।
भूमि और भवन संबंधी दस्तावेजों में भारी अनियमितताएं पाई गईं। जिस परिसर में कॉलेज दर्शाया गया, वहां स्कूल संचालन किया जा रहा है। छात्रवृत्ति वितरण में करोड़ों रुपये का संभावित फर्जीवाड़ा सामने आया।

कलेक्टर की जांच में भी शिकायत सही
मामले की शिकायत रतलाम कलेक्टर को की गई। आनन-फानन में 5 सदस्यीय जांच दल गठित किया गया। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि शिकायत तथ्यात्मक और सही है। इसके बावजूद न तो एफआईआर दर्ज हुई, न ही संचालक के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई।
यह सवाल खड़ा होता है।
जब जांच में दोष सिद्ध हो चुका, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या अधिकारियों के हाथ भी रंगे हुए हैं?
लंबे समय तक कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है: क्या तत्कालीन कलेक्टर की भूमिका संदेह के घेरे में है?

उज्जैन स्थित आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अब तक मामला दर्ज क्यों नहीं किया?
क्या शिक्षा माफिया को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
या फिर विभागीय मिलीभगत से पूरे मामले को दबाया जा रहा है? यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का घोटाला नहीं, बल्कि एक संगठित तंत्र की मिलीभगत का मामला प्रतीत होता है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
अब शिकायतकर्ता ने इंदौर खंडपीठ में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। यदि न्यायालय इस प्रकरण में सख्त रुख अपनाता है, तो रतलाम प्रशासन, EOW उज्जैन, AICTE भोपाल और CBSE नई दिल्ली सहित उच्च शिक्षा विभाग की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।
शिक्षा के नाम पर लूट?
यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की साख पर भी गहरा प्रहार है। जिस व्यवस्था पर विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा टिका है, यदि वहीं फर्जीवाड़ा पनपे तो यह पूरे समाज के लिए खतरे की घंटी है।
अब बड़ा सवाल यह है
जांच के बाद भी कार्रवाई न होना क्या किसी बड़े संरक्षण का संकेत है? या फिर प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव? जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक जावरा में शिक्षा माफिया के इस खेल पर पूर्ण विराम लगना मुश्किल है।

जावरा में शिक्षा माफिया का महाघोटाला!
कागजों में कॉलेज, जमीन पर स्कूल… करोड़ों की छात्रवृत्ति हड़पी, शिकायत के बाद भी कार्रवाई शून्य जिले के जावरा क्षेत्र में शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला अब और गहराता जा रहा है। पहले RTI से खुलासा हुआ, फिर कलेक्टर जांच में शिकायत सही पाई गई — लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ।
अब सामने आए शिकायत पत्र के दस्तावेजों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
AICTE निरीक्षण में भी गुमराह करने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2019 में AICTE की टीम पीजीडीएम कोर्स की मान्यता के लिए निरीक्षण करने आई थी। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने जिस भवन को कॉलेज बताया, वह वास्तव में पहले से संचालित स्कूल की बिल्डिंग थी। और भी चौंकाने वाली बात यह कि इसी भवन में वर्ष 2016 से CBSE से मान्यता प्राप्त हाई स्कूल संचालित हो रहा था।
यानी जिस भवन में स्कूल चल रहा था, उसी को कॉलेज की बिल्डिंग बताकर निरीक्षण कराया गया।
क्या यह निरीक्षण टीम को गुमराह करने की साजिश थी? कॉलेज केवल कागजों में, जमीन पर कुछ नहीं
शिकायत में उल्लेख है: अप्रैल 2019 से मार्च 2020 तक कॉलेज में पढ़ाई केवल कागजों में दर्शाई गई।
मौके पर न कॉलेज की बिल्डिंग, न स्टाफ, न छात्र मौजूद थे। जो स्टाफ सूची कॉलेज के नाम पर दी गई, वह स्कूल का स्टाफ बताया गया। कई शिक्षकों के पास कॉलेज में पढ़ाने की पात्रता तक नहीं थी। यदि कॉलेज वास्तविक था, तो: उपस्थिति रजिस्टर कहाँ है?
वेतन भुगतान किस बैंक से हुआ?
स्टाफ ने स्कूल का वेतन लिया या कॉलेज का?
ये सभी सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।
छात्रवृत्ति का खेल – खाते नागदा में क्यों?
सबसे गंभीर आरोप छात्रवृत्ति से जुड़ा है।
शिकायत के अनुसार:
अधिकांश छात्रों के खाते नागदा (उज्जैन जिला) में खुलवाए गए। जबकि कॉलेज जावरा क्षेत्र में दर्शाया गया। जावरा में सभी बैंक शाखाएं होने के बावजूद नागदा में खाते खुलवाना संदेह पैदा करता है।
प्रति छात्र लगभग ₹1,65,000 की छात्रवृत्ति बताई गई। पहले वर्ष में 300 छात्र — यानी 5 करोड़ से अधिक की राशि। अगले सत्र में फिर 300 प्रवेश — कुल मिलाकर 10 करोड़ से अधिक का खेल।
यदि 600 छात्रों ने प्रवेश लिया, तो:
वे छात्र कहां थे? पढ़ाई कहां हुई? क्लास, परीक्षा, उपस्थिति का रिकॉर्ड क्या है? भवन निर्माण और भूमि डायवर्जन में अनियमितता
शिकायत में यह भी आरोप है:
कोरोना काल (2020-21) में नई बिल्डिंग व छात्रावास निर्माण दिखाया गया। जिस भूमि का डायवर्जन हुआ, उस अनुपात में निर्माण नहीं। ग्राम पंचायत से निर्माण अनुमति नहीं ली गई। बिना विधिवत अनुमति शासन को गुमराह कर मान्यता प्राप्त की गई।
CA ऑडिट और EPF में भी गड़बड़ी?
शिकायत में उल्लेख है कि CA ऑडिट रिपोर्ट में दर्शाए गए वेतन और EPF जमा राशि में भारी असमानता है।
यदि वेतन भुगतान वास्तविक था, तो EPF में समान अनुपात क्यों नहीं? शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? सबसे बड़ा सवाल यही है —
शिकायत रतलाम कलेक्टर को दी गई। 5 सदस्यीय जांच दल गठित हुआ। जांच में शिकायत सही पाई गई।
दस्तावेजों सहित मामला प्रस्तुत किया गया।
उच्च स्तर पर प्रतिलिपियां भेजी गईं। फिर भी आज तक FIR दर्ज नहीं ,EOW ने भी कार्रवाई नहीं की,
मान्यता निरस्त नहीं, छात्रवृत्ति वसूली नहीं
क्या संरक्षण प्राप्त है? अब सवाल सीधे प्रशासन पर खड़े हो रहे हैं क्या तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है? क्या शिक्षा माफिया को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? क्या विभागीय मिलीभगत से मामला दबाया जा रहा है? जांच रिपोर्ट में शिकायत सही होने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
शिक्षा के नाम पर संगठित लूट?
यदि आरोप सही हैं तो यह सिर्फ एक संस्थान का मामला नहीं यह शिक्षा तंत्र में संगठित भ्रष्टाचार का संकेत है। जावरा में कागजों में कॉलेज, जमीन पर स्कूल, और करोड़ों की छात्रवृत्ति का खेल —
और प्रशासनिक चुप्पी। शिकायतकर्ता के अनुसार रतलाम कलेक्टर EOW SP सहित उच्च शिक्षा विभाग व जिम्मेदारों पर हाईकोर्ट का हंटर चलना तय हैं। अब देखना यह है कि न्यायालय क्या रुख अपनाता है।

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