November 6, 2026 3:25 pm

शिक्षक का ट्रांसफर नहीं रुका, अब ग्रामीणों पर FIR का शिकंजा।

रतलाम जिले की जावरा तहसील के गांव रूपनगर में सरकारी प्राथमिक स्कूल के शिक्षक बद्रीलाल राठौर का ट्रांसफर रुकवाने के लिए आंदोलन करना ग्रामीणों को अब भारी पड़ता नजर आ रहा है। शिक्षक का तबादला तो नहीं रुका, लेकिन ट्रांसफर के विरोध में बच्चों के साथ सड़क पर उतरकर चक्काजाम करने वाले ग्रामीण अब थाने और कोर्ट के चक्कर काटने की तैयारी करें।

मामला मंगलवार दोपहर महू-नीमच हाईवे पर रूपनगर फंटे के पास किए गए चक्काजाम से जुड़ा है। पुलिस ने इस मामले में प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी मुरलीधर बोरासी के प्रतिवेदन पर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जेजे एक्ट की धारा 83(2), बीएनएस की धारा 126(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस आंदोलन में बच्चों को भी सड़क पर उतारा गया, क्या उसके पीछे किसी ने बच्चों का इस्तेमाल किया? पुलिस अब इसी बिंदु पर जांच आगे बढ़ा रही है।

अभी FIR में कोई नामजद नहीं, वीडियो-फोटो से खुलेगा राज

ढोढर चौकी प्रभारी रघुवीर जोशी के मुताबिक, प्रभारी बीईओ मुरलीधर बोरासी की रिपोर्ट पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। रिपोर्टकर्ता आंदोलन में शामिल लोगों को नाम से नहीं जानते थे, इसलिए फिलहाल किसी को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।

पुलिस अब मौके पर मौजूद लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो और फोटो फुटेज खंगालकर आरोपियों की पहचान करेगी। पहचान होने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यानी फिलहाल FIR में नाम भले ही अज्ञात हों, लेकिन पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ चक्काजाम में शामिल लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

24 दिन से चल रहा था ट्रांसफर रोकने का आंदोलन

बताया जा रहा है कि करीब 24 दिन पहले शिक्षक बद्रीलाल राठौर का रूपनगर के सरकारी प्राथमिक स्कूल से सेमलिया स्कूल में ट्रांसफर कर दिया गया था। शिक्षक को रिलीव भी कर दिया गया और वे नई पदस्थापना पर चले गए।

लेकिन इसके बाद बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षक का ट्रांसफर रुकवाने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने विधायक से लेकर कलेक्टर तक ज्ञापन सौंपे। कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना भी दिया गया। बावजूद इसके जब ट्रांसफर नहीं रुका तो आंदोलनकारियों ने 21 जुलाई को रूपनगर फंटे के पास फोरलेन हाईवे पर चक्काजाम कर दिया।

अब इसी चक्काजाम को लेकर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

बच्चों को सड़क पर उतारने का आरोप, JJ एक्ट की गंभीर धारा ने बढ़ाई मुश्किल

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर बात किशोर न्याय अधिनियम यानी JJ Act की धारा 83(2) का लगाया जाना है। पुलिस के अनुसार आरोप है कि बच्चों का इस्तेमाल कर उनसे फोरलेन जाम करवाया गया।

इस धारा के तहत यदि किसी वयस्क व्यक्ति या वयस्कों के समूह द्वारा किसी बच्चे का उपयोग किसी अवैध गतिविधि के लिए किया जाता है, तो कड़ी सजा का प्रावधान है। इसमें 7 वर्ष तक के कारावास और 5 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

वहीं BNS की धारा 126(2) गलत तरीके से किसी व्यक्ति का रास्ता रोकने से संबंधित है। इसमें एक माह तक की साधारण जेल या जुर्माने का प्रावधान है।

आंदोलन से मुकदमे तक पहुंचा मामला

ग्रामीण शिक्षक का ट्रांसफर रुकवाने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे थे। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मांग पूरी नहीं होने के बाद सड़क पर चक्काजाम करना अब आंदोलनकारियों के लिए कानूनी मुसीबत बन गया है।

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती चक्काजाम में शामिल लोगों की पहचान करना है। इसके लिए मौके के वीडियो और फोटो को आधार बनाया जाएगा। पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट होगा कि चक्काजाम में कौन-कौन लोग शामिल थे और बच्चों को सड़क पर बैठाने के पीछे किसकी भूमिका थी।

फिलहाल मामला अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज है, लेकिन पुलिस की जांच आगे बढ़ते ही यह FIR नामजद आरोपियों तक पहुंच सकती है।

शिक्षक का ट्रांसफर रोकने की मांग लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब ग्रामीणों के लिए कानूनी लड़ाई में बदल गया है। सवाल अब सिर्फ शिक्षक के ट्रांसफर का नहीं, बल्कि यह भी है कि बच्चों को सड़क पर उतारकर हाईवे जाम करवाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? पुलिस की जांच में अब इसी सवाल का जवाब तलाशा जा रहा है।

जनचर्चा है कि शिक्षक राठौड़ का ट्रांसफर राजनीति द्वेषपूर्ण किया गया है वही ये भी बात सामने आई है कि शिक्षक राठौड़ सहित अन्य शिक्षकों व ग्रामीणों के सहयोग द्वारा प्रदेश में ऐसा स्कूल नही है जैसा रूपनगर में है। इस कारण से ग्रामीण व छात्र छात्रा शिक्षक राठौड़ का ट्रांसफर रुकवाने पर अड़े है।

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