जेडी बैरागी वैष्णव, रतलाम— मिलाद-उन-नबी या ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मुस्लिम समाज का महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है, जिसे पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के जन्म की याद में मनाया जाता है। इस अवसर पर उनके जीवन, चरित्र, शिक्षाओं और मानवता के लिए दिए गए संदेशों को याद किया जाता है। भारत सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मुस्लिम समाज इस दिन धार्मिक कार्यक्रम, नात, दुआ, कुरआन की तिलावत, तकरीर और जरूरतमंदों की मदद जैसे कार्य करता है।
पैगंबर मुहम्मद और उनका संदेश
इस्लामी मान्यता के अनुसार हजरत मुहम्मद इस्लाम के अंतिम पैगंबर साहब हैं। उनका जीवन सत्य, ईमानदारी, इंसाफ, दया, संयम और मानवता की सेवा के आदर्शों से जुड़ा हुआ माना जाता है। उनके संदेश में गरीबों, अनाथों, जरूरतमंदों और कमजोर लोगों के प्रति संवेदना तथा समाज में न्याय और भाईचारे पर विशेष जोर मिलता है।
भारत की राष्ट्रपति की ओर से मिलाद-उन-नबी के अवसर पर दिए गए संदेश में भी पैगंबर साहब की शिक्षाओं को अमन, प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की प्रेरणा बताया गया है।

भारत में वर्ष 2026 में मिलाद-उन-नबी 26 अगस्त को पड़ने की जानकारी उपलब्ध है।
मक्का से शुरू हुई पैगंबर साहब की जीवन यात्रा
परंपरागत इतिहास के अनुसार पैगंबर साहब का जन्म मक्का में हुआ था। उनके जीवनकाल में अरब समाज में अनेक सामाजिक और धार्मिक चुनौतियां मौजूद थीं। उन्होंने एकेश्वरवाद, नैतिक जीवन, सामाजिक न्याय और इंसानियत की जिम्मेदारी का संदेश दिया।
उनका जीवन केवल धार्मिक उपदेशों तक सीमित नहीं था, बल्कि पारिवारिक जीवन, पड़ोसियों के अधिकार, व्यापार में ईमानदारी, गरीबों की मदद और समाज में न्याय जैसे विषयों पर भी उनके आचरण को महत्वपूर्ण आदर्श माना जाता है।
भारत में मिलाद-उन-नबी
भारत में मिलाद-उन-नबी धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सामुदायिक आयोजन का अवसर भी बनता है। मस्जिदों और मदरसों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पैगंबर मुहम्मद के जीवन और शिक्षाओं पर वक्तव्य होते हैं, नात पढ़ी जाती हैं और दुआ की जाती है।
कई स्थानों पर गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराया जाता है तथा लोगों को आपसी भाईचारे, शांति और सद्भाव का संदेश दिया जाता है।
मिलाद का वास्तविक संदेश
मिलाद-उन-नबी का महत्व केवल सजावट, जुलूस या कार्यक्रमों तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। पैगंबर साहब के जीवन से जुड़ी शिक्षाओं को अपने व्यवहार में उतारना इस अवसर का सबसे महत्वपूर्ण संदेश माना जा सकता है।
ईमानदारी से व्यापार करना, पड़ोसी के अधिकारों का सम्मान करना, गरीब और जरूरतमंद की मदद करना, अन्याय से बचना, माता-पिता का सम्मान करना और समाज में शांति एवं भाईचारा कायम रखना ये ऐसे मूल्य हैं जो किसी भी समाज को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं।
आज के समय में मिलाद की प्रासंगिकता
आज समाज में आपसी तनाव, अविश्वास और सामाजिक दूरी जैसी चुनौतियां दिखाई देती हैं। ऐसे समय में धार्मिक अवसरों का उपयोग मानवता, शांति और सामाजिक सद्भाव के संदेश को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।
मिलाद-उन-नबी के अवसर पर यदि लोग पैगंबर साहब के जीवन से प्रेरणा लेकर जरूरतमंदों की मदद, गरीबों के प्रति संवेदना, सामाजिक न्याय और आपसी सम्मान को बढ़ावा दें, तो यह आयोजन समाज के लिए सकारात्मक संदेश का माध्यम बन सकता है।
निष्कर्ष
मिलाद-उन-नबी मुस्लिम समाज के लिए पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के जीवन और शिक्षाओं को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिन आस्था के साथ-साथ उनके बताए नैतिक मूल्यों पर विचार करने का अवसर भी प्रदान करता है।
मिलाद का सार केवल जश्न में नहीं, बल्कि पैगंबर साहब की शिक्षाओं को अपने आचरण में उतारने में है इंसानियत की सेवा, गरीबों की मदद, इंसाफ, अमन, प्रेम और भाईचारे को मजबूत करना ही इस अवसर को सार्थक बना सकता है।
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के जावरा में पैगम्बर जी द्वारा दी गई सिख को दरकिनार कर सुन्नी सीरत कमेटी व सीरत कमेटी केवल समाज को गुमराह एवम पैगम्बर साहब के नाम पर धर्म को धंदा बनाकर काम किया जा रहा है। तैमुर लंग पूर्व ऑटो चालक सहित कमेटियों के अध्यक्ष सचिव पैगम्बर साहब के कार्यक्रम के नाम पर अपना निजी स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हुए है। सुन्नी सीरत कमेटी 13 सालों से निरस्त है फिर भी समाज व प्रशासन को गुमराह कर आयोजन किया जा रहा है। जिसके अध्यक्ष विलायत मोहम्मद खान है व सचिव अमजद खान है। तो वही सीरत कमेटी के अध्यक्ष साबिर सेठ है जिनके ऑडियो वायरल हो रहे है। जिसमे ये दावा किया जा रहा है कि उन्होंने कमेटी से स्तीफा दे दिया है। तो सचिव अबरार खान है जो नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप में फिलाल जेल में बंद है।
क्या पैंगम्बर साहब ऐसे मुस्लिम समाज के निर्माण के पक्षधर थे, जो समाज के नाम पर केवल अपनी दुकानदारी चलाते रहे, समाज मे अनेक बुद्धिजीवी वर्ग है। जिनके हाथों में ऐसे आयोजनों की बागडोर सौपना चाहिए। वर्तमान में समाज की बागडोर ऐसे हाथों में है जो समाज को केवल अपने फायदे के लिए इतेमाल कर रहे है। ऐसे लोग पूजने के नही बल्कि कुछ और खाने योग्य है। समाज व प्रशासन को ऐसे लोगों को चिन्हित कर तत्काल कार्रवाई करना चाहिए।

नोट- शुभदर्शन TV न्यूज़ चैनल किसी भी धार्मिक आयोजन के खिलाफ नही है। ऐसे कार्यक्रम हमेशा होना चाहिए और बड़ चढ़कर होना चाहिए। लेकिन ऐसे लोग जब तक समाज के सरपरस्त बने हुए है। तब तक समाज का भला नही हो सकता है। जब तक ऐसे लोग समाज के सरपरस्त रहेंगे तब तक समाज को गुमराह कर केवल अपने फायदे के लिए स्तेमाल किया जाता रहेगा, ऐसे लोगों को समाज व प्रशासन को आइना दिखाना चाहिए।