रतलाम जिले की पिपलौदा तहसील के ग्राम सेमलखेड़ी काकड़ पर स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र की आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। ग्राम पंचायत रिछादेवड़ा के अंतर्गत आने वाला यह धार्मिक स्थल सेमलखेड़ी, चिकलाना और भाटखेड़ा काकड़ क्षेत्र के बीच स्थित है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार मंदिर में सच्ची श्रद्धा से आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और दर्शन तथा भभूति प्राप्त करने के बाद मानसिक शांति और राहत महसूस करते हैं। यही वजह है कि मंदिर की ख्याति अब आसपास के गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
पंडाजी जगदीश जी ने बताई मंदिर की धार्मिक महत्ता
मंदिर के पंडाजी जगदीश जी बताते हैं कि श्री महाकालेश्वर मंदिर पर दूर-दराज से भक्त लगातार पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में समय-समय पर भजन मंडलियां, कथा, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं।
विशेषकर नवरात्रि पर्व के दौरान अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रहती है और पूरा परिसर धार्मिक वातावरण से सराबोर हो जाता है।
श्रद्धालुओं का दावा—दर्शन और भभूति से मिलती है राहत
ग्रामीणों और आसपास के श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में दर्शन करने और भभूति प्राप्त करने से उन्हें मानसिक एवं आध्यात्मिक राहत मिलती है। भक्तों की गहरी आस्था के कारण मंदिर लगातार श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि जहां दूसरे राज्यों तक से श्रद्धालु आस्था लेकर पहुंच रहे हैं, उस धार्मिक स्थल की मूलभूत सुविधाओं को लेकर जिम्मेदार इतने बेपरवाह क्यों हैं?
मंदिर में लाइट व्यवस्था का मुद्दा, फिर भी जनप्रतिनिधियों की बेरुखी!
सबसे बड़ा सवाल मंदिर परिसर की लाइट व्यवस्था को लेकर खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों और ग्राम पंचायत की ओर से संबंधित जनप्रतिनिधियों को कई बार लाइट व्यवस्था की आवश्यकता से अवगत करवाए जाने की बात सामने आई है।
इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक इस दिशा में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई गई।
यह स्थिति तब है जब मंदिर में धार्मिक आयोजन होते हैं और दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में शाम और रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था होना श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद जरूरी है।
आस्था बड़ी, सुविधा छोटी क्यों?
एक ओर मंदिर में राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कई क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, धार्मिक आयोजन हो रहे हैं और नवरात्रि में अखंड ज्योति प्रज्वलित होती है। दूसरी ओर मंदिर परिसर में पर्याप्त रोशनी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए ग्रामीणों को बार-बार गुहार लगानी पड़ रही है।
ग्रामीणों का सवाल सीधा है—
क्या धार्मिक आस्था के इस केंद्र तक मूलभूत सुविधा पहुंचाना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी नहीं है?
जब ग्राम पंचायत द्वारा समस्या से अवगत कराया जा चुका है, तो फिर संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस मामले में ठोस कदम कब उठाएंगे?
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं ने मांग की है कि मंदिर परिसर और आने-जाने वाले मार्ग पर पर्याप्त लाइट व्यवस्था तत्काल उपलब्ध कराई जाए। साथ ही धार्मिक आयोजन एवं श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर क्षेत्र में अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाए।
अब देखना यह है कि सेमलखेड़ी के श्री महाकालेश्वर मंदिर की वर्षों पुरानी समस्या कब दूर होती है और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि श्रद्धालुओं की इस मांग पर कब गंभीरता दिखाते हैं।
आस्था के इस केंद्र पर भक्तों की आस्था लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं के मामले में जिम्मेदारों की उदासीनता ग्रामीणों के लिए बड़ा सवाल बनती जा रही है।
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