November 5, 2026 12:03 pm

गरीबी और सीमित संसाधनों को दी मात, बनबनी की बेटी प्रेमलता ने रचा सफलता का इतिहास

रतलाम- बड़े शहरों के महंगे स्कूल, लाखों रुपये की कोचिंग और सुविधाओं के बीच पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भी NEET जैसी परीक्षा आसान नहीं होती। लेकिन रतलाम के समीप छोटे से गांव बनबनी की बेटी प्रेमलता ने सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया। सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाली प्रेमलता ने अपनी मेहनत और जिद के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे गांव और क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

NEET-2026 में शानदार सफलता हासिल कर प्रेमलता ने GMC भोपाल में MBBS में प्रवेश प्राप्त किया है। खास बात यह है कि उन्होंने यह सफलता किसी बड़े निजी स्कूल या वर्षों लंबी महंगी कोचिंग के सहारे नहीं, बल्कि अपनी नियमित पढ़ाई के साथ संघर्ष करते हुए हासिल की।

12वीं तक डॉक्टर बनने की राह से भी अनजान थीं प्रेमलता

प्रेमलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि 12वीं तक उन्हें यह तक पता नहीं था कि डॉक्टर बनने के लिए कौन-सी परीक्षा देनी होती है। गांव के शासकीय विद्यालय से प्रारंभिक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कामठाना के शासकीय विद्यालय से आगे की शिक्षा पूरी की।

12वीं के बाद उन्होंने B.Sc. में प्रवेश लिया और स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद M.Sc. में प्रवेश लिया। रतलाम आकर आगे की पढ़ाई के दौरान उन्हें NEET और मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी मिली। यहीं से उनके मन में डॉक्टर बनने का सपना जन्मा।

पहला प्रयास असफल हुआ, लेकिन हौसला नहीं टूटा

M.Sc. के प्रथम वर्ष में पढ़ाई के साथ प्रेमलता ने पहली बार NEET की परीक्षा दी। ऑनलाइन माध्यम से तैयारी करते हुए उन्होंने परीक्षा तो दी, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

यह असफलता उनके लिए रुकने की वजह नहीं बनी। बल्कि उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और समझा कि NEET जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा के लिए केवल मेहनत पर्याप्त नहीं है। सही रणनीति, लगातार अभ्यास और अनुभवी मार्गदर्शन भी उतना ही जरूरी है।

अभ्यास से जुड़ीं और बदल गई तैयारी की दिशा

एक परिचित के माध्यम से प्रेमलता को रतलाम के अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट की जानकारी मिली। इसके बाद M.Sc. के दूसरे वर्ष में उन्होंने अभ्यास ज्वाइन किया।

यहां उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के साथ NEET की तैयारी को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। नियमित कक्षाएं, टेस्ट सीरीज, लगातार प्रश्नों का अभ्यास, कमजोर विषयों पर विशेष फोकस और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी।

आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद संस्थान की ओर से भी प्रेमलता को पढ़ाई में सहयोग दिया गया, ताकि आर्थिक परेशानी उनके डॉक्टर बनने के सपने के रास्ते में दीवार न बन सके।

एक साल की मेहनत ने बदल दी पूरी जिंदगी

M.Sc. की पढ़ाई और NEET की तैयारी को एक साथ संभालना आसान नहीं था। एक तरफ कॉलेज की जिम्मेदारी थी तो दूसरी तरफ देश की कठिनतम प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल NEET की चुनौती।

लेकिन प्रेमलता ने हार नहीं मानी। करीब एक वर्ष तक लगातार मेहनत, अभ्यास और अनुशासन के साथ उन्होंने तैयारी जारी रखी।

नतीजा सामने आया तो संघर्ष की सारी तस्वीर बदल गई।

NEET-2026 में सफलता हासिल कर प्रेमलता ने GMC भोपाल में MBBS की सीट अपने नाम कर ली।

जिस गांव की बेटी कभी डॉक्टर बनने की राह से अनजान थी, वही बेटी अब डॉक्टर बनने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठा चुकी है।

“प्रतिभा गांवों में भी है, जरूरत सिर्फ अवसर और मार्गदर्शन की”

अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने प्रेमलता की सफलता पर कहा कि प्रतिभा बड़े शहरों या महंगे स्कूलों की मोहताज नहीं है। यदि विद्यार्थी में मेहनत, लगन और आगे बढ़ने का जुनून हो तथा उसे सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो गांव और सामान्य आर्थिक परिस्थितियों से आने वाला विद्यार्थी भी देश की कठिनतम प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रेमलता की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए बड़ा संदेश है, जो आर्थिक परेशानियों के कारण अपने सपनों को छोटा समझ लेते हैं। प्रेमलता ने साबित किया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, मजबूत इरादों के सामने उन्हें बदला जा सकता है।

अब बनबनी की बेटी पहनेगी डॉक्टर का सफेद कोट

प्रेमलता की सफलता से उनके परिवार के साथ-साथ गांव बनबनी और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। माता-पिता ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेटी की पढ़ाई जारी रखी और आज उनकी मेहनत का परिणाम सामने है।

अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट की टीम ने भी प्रेमलता और उनके परिवार को बधाई देते हुए मिठाई खिलाकर सम्मान किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

बनबनी जैसे छोटे से गांव से निकलकर GMC भोपाल तक पहुंची प्रेमलता की कहानी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए चुनौती और संदेश है जो संसाधनों की कमी को अपनी किस्मत मानकर बैठ जाते हैं।

प्रेमलता ने साबित कर दिया मंजिल महंगे स्कूलों से नहीं, बल्कि बड़े हौसले, सही दिशा और लगातार मेहनत से हासिल होती है।

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