November 5, 2026 12:08 pm

अहिंसा के प्रकाश से आलोकित हुआ जेपीएस परिसर, विद्यार्थियों ने ‘जियो और जीने दो’ का लिया संकल्प

रतलाम जिले के जावरा पब्लिक स्कूल परिसर में भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति, आध्यात्मिक चेतना एवं उल्लास से परिपूर्ण विशेष आयोजन किया गया। संपूर्ण विद्यालय परिसर भगवान महावीर के करुणा, अहिंसा और आत्मशुद्धि के संदेशों से गुंजायमान रहा। विद्यार्थियों ने भक्तिभाव से भगवान महावीर स्वामी की स्तुति एवं गुणगान कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पर्युषण पर्व के आध्यात्मिक महत्व, उद्देश्य एवं उसके पीछे निहित जीवन-दर्शन को सरल एवं प्रभावी रूप से समझा। विद्यार्थियों को बताया गया कि पर्युषण केवल एक पर्व नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने, आत्मचिंतन करने, अपनी भूलों को स्वीकार करने, मन को निर्मल बनाने तथा जीवन को सदाचार की दिशा में ले जाने का अवसर है। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने पर्युषण पर्व के माध्यम से आत्मशुद्धि, क्षमा, संयम, तप और सद्भावना के महत्व को समझा तथा इसके संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
आयोजन में विद्यार्थियों को माता त्रिशला के चौदह स्वप्नों के बारे में भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। भगवान महावीर स्वामी के जन्म एवं उनके जीवन से जुड़े इन शुभ स्वप्नों के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को विद्यार्थियों ने रुचिपूर्वक जाना। साथ ही उन्हें भगवान महावीर के जीवन, त्याग, तप, संयम, करुणा एवं आत्मानुशासन से परिचित कराया गया।
विद्यार्थियों को भगवान महावीर स्वामी के प्रमुख जीवन-संदेश “अहिंसा, सत्य और आत्मशुद्धि” के महत्व को समझाते हुए बताया गया कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल पूजा-अर्चना में नहीं, बल्कि अपने विचारों, वाणी और व्यवहार को पवित्र बनाने में निहित है। भगवान महावीर का जीवन हमें सिखाता है कि प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, सम्मान और संवेदना का भाव रखना ही मानवता की सच्ची पहचान है। उनका अमर संदेश “जियो और जीने दो” आज भी शांतिपूर्ण एवं सद्भावपूर्ण समाज के निर्माण का मार्ग दिखाता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के निदेशक श्री कमल मूणत एवं प्रधानाचार्य डॉ. पीयूष मूणत की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भगवान महावीर स्वामी के जीवन एवं उनके सिद्धांतों को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि विचारों की शुद्धता, व्यवहार की विनम्रता, कर्मों की पवित्रता और दूसरों के प्रति करुणा से प्राप्त होती है।
प्रधानाचार्य डॉ. पीयूष मूणत ने विद्यार्थियों को जीवन का सार समझाते हुए प्रेरित किया कि मनुष्य को अपने भीतर के क्रोध, अहंकार, लोभ और द्वेष पर विजय प्राप्त करने का निरंतर प्रयास करना चाहिए। दूसरों को बदलने से पहले स्वयं को बेहतर बनाना ही आत्मविकास की पहली सीढ़ी है। उन्होंने विद्यार्थियों को भगवान महावीर के सिद्धांतों को केवल सुनने तक सीमित न रखते हुए उन्हें अपने दैनिक जीवन के व्यवहार में उतारने का संदेश दिया।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार द्वारा भगवान महावीर स्वामी के अहिंसा, सत्य, संयम, करुणा, क्षमा और आत्मशुद्धि के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का भाव व्यक्त किया गया। विद्यार्थियों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम का वातावरण इस भावना से ओत-प्रोत रहा कि जब विचारों में अहिंसा, वाणी में सत्य और हृदय में करुणा का वास होता है, तभी जीवन वास्तव में प्रकाशमय बनता है। भगवान महावीर स्वामी के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए विद्यार्थियों ने स्वयं को श्रेष्ठ संस्कारों, सदाचार और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
“अहिंसा से शांति, सत्य से शक्ति, संयम से आत्मबल और आत्मशुद्धि से जीवन का वास्तविक उत्थान होता है।”

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