November 5, 2026 12:06 pm

रतलाम कलेक्टर का इंतजार करते-करते कलेक्ट्रेट में बैठ गए किसान, दो घंटे बाद पढ़ी हनुमान चालीसा

रतलाम में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की दावा राशि के भुगतान सहित 37 सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार दोपहर भारतीय किसान संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तैयार किया था, जिसमें प्रदेश स्तरीय मांगों के साथ रतलाम जिले की कृषि, सिंचाई, बिजली, राजस्व और फसल बीमा से जुड़ी स्थानीय समस्याओं को भी शामिल किया गया।

किसानों ने साफ कर दिया कि वे कलेक्टर से मुलाकात के बाद ही ज्ञापन सौंपेंगे। कलेक्टर चैंबर में मौजूद नहीं थे, इसलिए किसान कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरने पर बैठ गए। करीब दो घंटे तक इंतजार के बाद भी कलेक्टर नहीं पहुंचे तो किसानों ने वहीं हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।

अधिकारियों ने ज्ञापन लेने की कोशिश की, किसानों ने किया इनकार

किसानों के धरने की जानकारी के बाद डिप्टी कलेक्टर संजय शर्मा और नायब तहसीलदार रामचंद्र पांडेय ज्ञापन लेने पहुंचे। लेकिन किसानों ने उन्हें ज्ञापन देने से इनकार कर दिया।

किसानों का कहना था कि वे जिले की समस्याओं को लेकर सीधे कलेक्टर से मिलने आए हैं और कलेक्टर से चर्चा किए बिना ज्ञापन स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसानों ने दो टूक कहा कि जब तक कलेक्टर उनसे नहीं मिलेंगे, वे कलेक्ट्रेट से नहीं जाएंगे।

कलेक्टर के आने का इंतजार, बढ़ता गया किसानों का आक्रोश

किसानों के कलेक्ट्रेट पहुंचने से कुछ समय पहले कलेक्टर अजय कटेसरिया बैठक लेकर कार्यालय से निकल गए थे। किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। तक कलेक्टर के नहीं आने पर किसानों का आक्रोश बढ़ गया।

किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “एसी में बैठकर पिज्जा-बर्गर खाने वाले अधिकारी किसानों की परेशानी क्या समझेंगे?” किसानों ने कहा कि वे खेतों में दिन-रात मेहनत करते हैं और फसल खराब होने के बाद बीमा तथा राहत राशि के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

किसानों ने यह भी कहा कि यदि कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आते हैं तो वे कलेक्ट्रेट परिसर में ही खाना बनाएंगे और अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

जब कलेक्टर कार्यालय नहीं पहुंचे। इसके बाद अपर कलेक्टर बृजेंद्र रावत कलेक्ट्रेट पहुंचे और किसानों से बातचीत की।

फसल बीमा से लेकर समर्थन मूल्य तक 37 मांगें

भारतीय किसान संघ ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की दावा राशि के भुगतान में पारदर्शिता की मांग की है। किसानों ने कहा कि केला और मिर्च की फसल को भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल किया जाए।

इसके अलावा किसानों ने

– सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए पंजीयन शुरू करने।
– खरीफ की सभी प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी सुनिश्चित करने।
– धान, मक्का, ज्वार और बाजार सहित अन्य फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी।
– किसान योजनाओं के संचालन की जिला स्तर पर निगरानी के लिए किसान प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए समिति बनाने।
– कृषि, सिंचाई, बिजली और राजस्व से जुड़ी समस्याओं का निराकरण करने।

समेत कुल 37 मांगें ज्ञापन में रखीं।

55 ग्राम पंचायतों में बीमा राशि नहीं मिलने का दावा

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष पालीवाल ने बताया कि पिछली बार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले को करीब 213 करोड़ रुपए की राहत राशि मिली थी, जबकि इस बार करीब 42 करोड़ रुपए बीमा राशि मिलने की बात कही जा रही है।

उनके अनुसार जिले की 15 ग्राम पंचायतों में बीमा राशि मिली है, जबकि 55 ग्राम पंचायतों में राशि नहीं मिली। किसानों ने मांग की कि सोयाबीन की राहत राशि को लेकर पुराने सर्वे के आधार पर जिले की सर्वे रिपोर्ट का दोबारा मिलान किया जाए और पात्र किसानों को पूर्ववत बीमा राशि दिलाई जाए।

कलेक्ट्रेट में किसानों को पानी तक नहीं मिला

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कलेक्ट्रेट की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। अलग-अलग क्षेत्रों से आए किसानों का कहना था कि उन्हें पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

किसानों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के अधीक्षक के चैंबर में जाकर पानी के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि आरओ लगा हुआ है। किसानों का कहना था कि आरओ में भी पानी उपलब्ध नहीं था।

इस पर किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट में अपनी समस्या लेकर आने वाले किसानों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है, तो आम आदमी की समस्याओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

“कलेक्टर से मिले बिना नहीं जाएंगे” शाम तक जारी रहा इंतजार

किसानों ने पूरे प्रदर्शन के दौरान अपना रुख स्पष्ट रखा कि वे कलेक्टर से मिले बिना वापस नहीं जाएंगे। दोपहर से शाम तक चले इस घटनाक्रम में किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता रहा। कलेक्ट्रेट परिसर में धरना, अधिकारियों को ज्ञापन देने से इनकार और बाद में हनुमान चालीसा का पाठ इन घटनाओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों की नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया।

अब किसानों की मांग है कि केवल ज्ञापन लेकर मामले को खत्म करने के बजाय 37 मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए और फसल बीमा सहित स्थानीय समस्याओं का वास्तविक समाधान किया जाए।

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