रतलाम जिले के ढोढर में रेलवे स्टेशन पर लंबे समय से तीन जोड़ी महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की मांग अब महज मांग नहीं रही, बल्कि संगठित आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। क्षेत्रवासियों की लगातार अनदेखी से नाराज युवाओं ने 21 सदस्यीय रेल रोको संघर्ष समिति का गठन कर आंदोलन की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। समिति ने यात्रियों और क्षेत्रवासियों से समर्थन जुटाने के लिए हस्ताक्षर अभियान भी शुरू कर दिया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि रेलवे की ओर से ढोढर में ट्रेनों के ठहराव को लेकर प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजे जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे में अब पूरा मामला रेलवे मुख्यालय की मंजूरी पर टिक गया है।
दोहरीकरण के बाद बदला स्टेशन, लेकिन ट्रेनों का ठहराव अब भी दूर
ढोढर स्टेशन पर रेलवे लाइन के दोहरीकरण के बाद यात्री सुविधाओं और स्टेशन के स्वरूप में बदलाव जरूर हुआ, लेकिन क्षेत्रवासियों की मूल मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है। ढोढर सहित आसपास के करीब 16 गांवों के यात्रियों को महत्वपूर्ण ट्रेनों में सफर करने के लिए जावरा, रतलाम अथवा अन्य स्टेशनों का रुख करना पड़ता है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि ट्रेन का स्टॉपेज नहीं होने का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ रहा है। मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाना हो, विद्यार्थियों को कॉलेज या परीक्षा के लिए यात्रा करनी हो, व्यापारियों को व्यापारिक काम से निकलना हो या फिर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की बात हो—हर वर्ग को अतिरिक्त समय और किराए का भार उठाना पड़ रहा है।
सांसद सुधीर गुप्ता को भी कई बार अवगत करवाया, फिर भी सुनवाई का इंतजार
क्षेत्रवासियों का कहना है कि ढोढर में ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर सांसद सुधीर गुप्ता को भी कई बार अवगत करवाया जा चुका है। इसके बावजूद लंबे समय से मांग के समाधान को लेकर क्षेत्रवासियों को ठोस परिणाम का इंतजार है।
अब युवाओं ने इस मुद्दे को संगठित तरीके से उठाने का निर्णय लिया है। 21 सदस्यीय रेल रोको संघर्ष समिति के गठन और हस्ताक्षर अभियान के बाद साफ है कि क्षेत्रवासी इस मांग को लेकर अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
रेलवे ने कहा—प्रस्ताव मुख्यालय भेजा
मामले में डीआरएम अश्विनी कुमार ने बताया कि ढोढर में ट्रेनों के ठहराव की मांग रेलवे के संज्ञान में है। रेलवे की ओर से प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय भेजा गया है। मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद ट्रेनों का स्टॉपेज शुरू किया जाएगा।
रेलवे के इस जवाब के बाद अब क्षेत्रवासियों की निगाहें मुख्यालय के निर्णय पर टिकी हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब मांग लंबे समय से रेलवे के संज्ञान में है और प्रस्ताव भी मुख्यालय भेजा जा चुका है, तो मंजूरी में आखिर कितना समय और लगेगा?
अब आश्वासन नहीं, निर्णय की मांग
ढोढर और आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि यात्रियों की संख्या, क्षेत्र की जरूरत और लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए अब केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है। क्षेत्रवासी चाहते हैं कि रेलवे मुख्यालय जल्द निर्णय लेकर महत्वपूर्ण ट्रेनों को ढोढर स्टेशन पर ठहराव दे, ताकि करीब 16 गांवों के यात्रियों को अनावश्यक रूप से दूसरे स्टेशनों तक जाने की परेशानी से राहत मिल सके।
हस्ताक्षर अभियान और संघर्ष समिति के गठन के बाद अब यह मुद्दा स्थानीय स्तर से निकलकर आंदोलन की दिशा में बढ़ चुका है। ऐसे में देखना होगा कि रेलवे मुख्यालय क्षेत्रवासियों की इस मांग पर कब तक फैसला करता है।

ब्यूरो रिपोर्ट — शुभदर्शन TV न्यूज़ चैनल