जेडी बैरागी वैष्णव- शुभदर्शन TV न्यूज़ चैनल रतलाम-पुलिस में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अब सख्ती का दौर शुरू होता दिखाई दे रहा है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशों के नाम से जारी 15 सूत्रीय दिशा-निर्देशों में पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कई महत्वपूर्ण पाबंदियां और सावधानियां तय की गई हैं। खास तौर पर वर्दी में फोटो, वीडियो, रील या ऑडियो क्लिप पोस्ट करने को लेकर स्पष्ट रोक की बात कही गई है।
जारी निर्देशों में दो टूक कहा गया है कि पुलिसकर्मी वर्दी में फोटो, वीडियो, रील या ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करेंगे। इसके अलावा सरकारी दस्तावेजों, स्क्रीनशॉट अथवा अन्य माध्यमों से गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने पर भी रोक लगाई गई है।
रील के चक्कर में वर्दी की गरिमा से समझौता नहीं!
सोशल मीडिया के दौर में पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी में फोटो और वीडियो साझा करने का चलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में रतलाम पुलिस के निर्देश को वर्दी की गरिमा और विभागीय अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है।
निर्देशों में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यानी सोशल मीडिया पर की गई ऐसी गतिविधि अब महज व्यक्तिगत मामला नहीं मानी जाएगी, बल्कि विभागीय अनुशासन के दायरे में भी आ सकती है।
ChatGPT और Gemini जैसे AI टूल पर भी सरकारी दस्तावेज अपलोड करने पर रोक
सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक है AI टूल्स का इस्तेमाल। जारी निर्देशों में ChatGPT, Gemini सहित AI टूल्स पर सरकारी दस्तावेज अपलोड करने पर भी प्रतिबंध की बात कही गई है।
यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी दस्तावेजों में संवेदनशील अथवा गोपनीय जानकारी हो सकती है। किसी दस्तावेज को बिना अनुमति बाहरी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से जानकारी के अनधिकृत प्रसार का जोखिम पैदा हो सकता है।

जांच से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर नहीं होगी सार्वजनिक
निर्देशों में पीड़ित, आरोपी और गवाहों से जुड़ी फोटो-वीडियो पोस्ट करने पर भी रोक बताई गई है। साथ ही जांच और विवेचना से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश हैं।
इसका सीधा असर पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया पोस्टिंग पर पड़ेगा। किसी मामले में कार्रवाई, गिरफ्तारी, जांच या विवेचना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अब व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट से साझा करने से पहले नियमों के दायरे में आएगी।
VIP सुरक्षा से लेकर हथियार प्रशिक्षण तक फोटो-वीडियो पर भी पाबंदी
15 सूत्रीय दिशा-निर्देशों में VIP सुरक्षा से संबंधित सेल्फी और संवेदनशील फोटो को सार्वजनिक नहीं करने की बात कही गई है। इसी तरह हथियार प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी, दबिश और संवेदनशील कार्रवाई से जुड़े फोटो-वीडियो पोस्ट करने पर भी रोक बताई गई है।
साथ ही संवेदनशील ड्यूटी की जानकारी और लोकेशन साझा नहीं करने तथा जियो-टैगिंग बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस की सामूहिक उपलब्धि का श्रेय व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्रचार को नहीं
निर्देशों में पुलिस की सामूहिक उपलब्धियों को व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में सोशल मीडिया पर प्रचारित नहीं करने की बात भी कही गई है। इसके अलावा भेदभावपूर्ण, दुर्भावनापूर्ण या आपत्तिजनक पोस्ट पर भी रोक बताई गई है।
पेड प्रमोशन और सोशल मीडिया से कमाई को लेकर भी अनुमति संबंधी नियम बताए गए हैं। निर्देश के अनुसार सोशल मीडिया से हुई आय की जानकारी भी विभाग को देने की बात कही गई है।
न्यायालय में लंबित मामलों पर संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी
न्यायालय में लंबित मामलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि जांच अथवा अभियोजन की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
साथ ही किसी मामले में अस्पष्ट या अनधिकृत जानकारी मिलने पर सोशल मीडिया समूहों में प्रतिक्रिया देने से बचने को कहा गया है।
अब सोशल मीडिया भी निगरानी के दायरे में
इन 15 बिंदुओं का सबसे बड़ा संदेश यही है कि पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया अब पूरी तरह निजी क्षेत्र नहीं रह गया है। वर्दी, सरकारी दस्तावेज, संवेदनशील ड्यूटी, जांच, आरोपी-पीड़ित की जानकारी, हथियार प्रशिक्षण और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी सामग्री को लेकर विभाग ने स्पष्ट सीमाएं तय करने की कोशिश की है।
निर्देशों में साफ तौर पर सख्ती और निगरानी बढ़ने की बात सामने आती है। ऐसे में अब पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर एक फोटो, एक रील या एक पोस्ट करने से पहले भी यह देखना होगा कि कहीं वह विभागीय निर्देशों की सीमा तो नहीं लांघ रही।
संदेश साफ है वर्दी की पहचान सोशल मीडिया की रील नहीं, बल्कि अनुशासन और जिम्मेदारी है।