November 5, 2026 11:53 am

राजेश वासन हत्याकांड में आरोपी को सश्रम आजीवन कारावास, 5 हजार का जुर्माना

रतलाम शहर के राजीव नगर में हुए सनसनीखेज राजेश वासन हत्याकांड में रतलाम की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश श्री निर्मल मंडोरिया की अदालत ने आरोपी जगन्नाथ पिता भूरालाल मोगिया, उम्र 41 वर्ष, निवासी ग्राम धमाना, थाना बदनावर, जिला धार को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए धारा 302 भादवि के तहत सश्रम आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। फैसला 22 सितंबर 2026 को सुनाया गया।

यह मामला वर्ष 2022 का है और इसकी जांच के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने पुलिस और आसपास के लोगों को झकझोर दिया था। राजीव नगर स्थित मकान में राजेश वासन की जिस हालत में लाश मिली थी, उससे हत्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता था।

दो दिन से घर नहीं पहुंचे थे राजेश

अभियोजन के अनुसार 13 नवंबर 2022 को फरियादी कृष्ण मोहन शर्मा को अपनी पत्नी सीमा के माध्यम से जानकारी मिली कि उनके साले राजेश वासन दो दिन से अपनी मां से मिलने पीएनटी कॉलोनी स्थित घर नहीं पहुंचे हैं। राजेश का मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था।

परिवार को चिंता हुई तो कृष्ण मोहन शर्मा राजीव नगर स्थित राजेश के घर पहुंचे। मकान का नीचे का मुख्य दरवाजा खुला था। आवाज लगाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद परिचित शिवनारायण को साथ लेकर जब वे ऊपर गए तो बीच के कमरों का दरवाजा खुला था और सामान बिखरा हुआ दिखाई दिया।

इसके बाद तीसरी मंजिल के आखिरी कमरे में जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे मामले को हत्या में बदल दिया।

हाथ-पैर बंधे, मुंह और आंखों पर टेप

अभियोजन के मुताबिक राजेश वासन कमरे में मृत अवस्था में पड़े मिले। उनके पैर प्लास्टिक पैकिंग रिबन से बंधे थे, जबकि दोनों हाथ सफेद टेप से बंधे हुए थे। मुंह और आंखों पर भी सेलो टेप चिपका हुआ था। नाक से खून निकला था और शरीर के नीचे फर्श पर काफी खून पड़ा था।

शरीर पर घुटनों और कोहनियों के पास रगड़ के निशान भी बताए गए। घटनास्थल की स्थिति देखकर फरियादी ने आशंका जताई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने राजेश की हत्या की है।

मामले की सूचना पुलिस को दी गई और थाना औद्योगिक क्षेत्र रतलाम में अपराध क्रमांक 808/2022, धारा 302 भादवि के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।

CCTV से लेकर वैज्ञानिक साक्ष्य तक जुटाए गए

हत्या के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपी तक पहुंचने की थी। जांच के दौरान पुलिस ने फरियादी और अन्य साक्षियों के बयान दर्ज किए। घटनास्थल और उसके आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज एवं रिकॉर्डिंग जुटाई गई।

पुलिस ने घटनास्थल से मिले विभिन्न साक्ष्यों को भी जांच के लिए सुरक्षित किया। खून लगे कपड़े, हथियार सहित अन्य सामग्री को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। इसके साथ ही आरोपियों के मोबाइल फोन की CDR, CAF और लोकेशन जैसी तकनीकी जानकारियां भी जुटाई गईं।

यानी पुलिस जांच केवल मौखिक बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि CCTV फुटेज, तकनीकी जानकारी, वैज्ञानिक जांच और चिकित्सकीय साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।

अदालत में अभियोजन के साक्ष्यों पर टिका फैसला

संपूर्ण विवेचना के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त के विरुद्ध अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से मौखिक, दस्तावेजी, वैज्ञानिक और चिकित्सकीय साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।

इन साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश श्री निर्मल मंडोरिया की अदालत ने आरोपी जगन्नाथ को धारा 302 भादवि के तहत दोषसिद्ध माना और सश्रम आजीवन कारावास तथा 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण में अभियोजन की पैरवी

जिला अभियोजन कार्यालय के अनुसार यह मामला चिन्हित, जघन्य एवं सनसनीखेज श्रेणी का था। शासन की ओर से इस प्रकरण में विशेष लोक अभियोजक गोल्डन राय ने पैरवी की।

फैसले के साथ ही करीब चार वर्ष पुराने इस हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। राजीव नगर के उस मकान में हुई हत्या ने जिस तरह पुलिस के सामने चुनौती खड़ी की थी, उसमें CCTV फुटेज, तकनीकी जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य और चिकित्सकीय साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

22 सितंबर 2026 का यह फैसला एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, तकनीकी जांच और वैज्ञानिक परीक्षण अदालत में मामले की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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