रतलाम शहर की अग्रणी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था महक कला, साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच द्वारा गुलाब चक्कर में आयोजित विशाल “सामाजिक समरसता काव्य रसधारा” कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रभावी संगम देखने को मिला। वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों, शायरों और नवोदित रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में प्रेम, भाईचारे, राष्ट्रभावना और समरसता का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था अध्यक्ष मोड़ी राम सोलंकी ‘एकांत’ ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर की। अतिथियों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया। सोलंकी ने संस्था की 25 वर्षों की साहित्यिक यात्रा और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महक लगातार साहित्य और संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़ने का काम कर रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. रत्नदीप निगम ने कहा कि साहित्यकार अपनी कविता, गीत और गजल के माध्यम से समाज में समरसता का संदेश पहुंचा रहे हैं, यह सराहनीय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि साहित्य के क्षेत्र में राजनीति का समावेश नहीं होना चाहिए। उन्होंने संस्था के राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए महक द्वारा किए जा रहे प्रयास अनुकरणीय हैं। उन्होंने संस्था को “रतलाम की धरोहर” बताया।

मुख्य अतिथि डॉ. गीता दुबे ने महक को निस्वार्थ भाव से काम करने वाली अनूठी संस्था बताते हुए कहा कि संस्था ने रतलाम ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी पहचान बनाई है। खासकर नवोदित रचनाकारों को मंच देकर उनका उत्साह बढ़ाना संस्था की बड़ी उपलब्धि है।
वरिष्ठ साहित्यकार एवं मार्गदर्शक डॉ. प्रदीप सिंह राव ने कहा कि महक ने रतलाम में एक नया साहित्यिक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने इसे शहर के लिए स्वर्णिम सौगात बताते हुए कहा कि संस्था ने साहित्य के क्षेत्र में ऐसा मंच तैयार किया है, जहां हर वर्ग को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है।
शिक्षाविद् दिनेश शर्मा ने कहा कि महक के कार्यक्रम राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत रहते हैं। संस्था के आयोजनों में राष्ट्रप्रेम और देश के प्रति समर्पण स्पष्ट दिखाई देता है।
कविताओं में दिखा समाज का आईना
काव्य रसधारा में रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों पर भी प्रहार किया। राधाकिशन सतवानी ने नैतिकता और राजनीति पर सवाल उठाते हुए अपनी पंक्तियों से व्यवस्था का आईना दिखाया। वहीं सुनील निरंजनी ने मोहब्बत और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
शायर अब्दुल सलाम खोकर ने बेटी के महत्व को अपनी रचना के माध्यम से भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। सपना पिरोदिया ने जुबान की ताकत और रिश्तों की संवेदनशीलता पर अपनी रचना प्रस्तुत की। हरिशंकर भटनागर ने गांव की गलियों और मिट्टी से जुड़ी भावनाओं को कविता के माध्यम से सामने रखा।
कार्यक्रम में संजय परसाई ‘सरल’, अलक्ष चंद्र व्यास, शिवराज सिंह, योगेंद्र पुरोहित, श्रीराम दवे, आई.एल. पुरोहित, जफर कुरैशी, लक्ष्मीबाई राव, निसार रंभापुरी, श्रवण चौहान, ऐश्वर्य भट्ट, हीरालाल खराड़ी, प्रभुलाल रावल, दिलीप जोशी, शिवलाल चौहान ‘शिव’, यू.एल. जायसवाल, दिलीप वर्मा सहित अनेक रचनाकारों ने काव्य पाठ किया।
नवोदित प्रतिभाओं का दिखा उत्साह
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ नवोदित रचनाकारों ने भी पूरे उत्साह से अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। मंच ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देकर साहित्य की नई पीढ़ी को प्रोत्साहित किया।
आयोजन में नगर के अनेक प्रबुद्ध नागरिक एवं साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षाविद् दिनेश शर्मा ने किया तथा आभार सुनील निरंजनी ने माना।
महक के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, सवाल उठाने और सामाजिक समरसता की आवाज बुलंद करने की ताकत भी रखता है।
