रतलाम जिले में नामली थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। डोडाचूरा से भरी एक क्रेटा कार मिलने के बावजूद कथित रूप से कार्रवाई नहीं करने के मामले में एसपी अमित कुमार ने नामली थाने में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल दिलीप रावत और कॉन्स्टेबल माखनसिंह को लाइन अटैच कर दिया है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिसकर्मियों के आचरण की जांच अब ग्रामीण एएसपी विवेक कुमार को सौंपी गई है। वहीं, पूरे घटनाक्रम में कार को आखिर क्यों छोड़ा गया? किसके दबाव में छोड़ा गया? और क्या इसके पीछे किसी तरह का लेनदेन हुआ था? जैसे सवाल पुलिस विभाग के भीतर ही चर्चा का विषय बने हुए हैं।
हालांकि लाखों रुपए के कथित लेनदेन की बात की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यही वह बिंदु है, जिस पर जांच की पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
चेकिंग में मिली डोडाचूरा से भरी क्रेटा, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
सूत्रों के अनुसार मामला 4 अक्टूबर की रात का बताया जा रहा है। नामली थाना क्षेत्र के बड़ौदा फंटा के पास स्थित दो ढाबों में से एक पर पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान काले रंग की क्रेटा कार में डोडाचूरा मिलने की बात सामने आई।
यदि वाहन में मादक पदार्थ मिला था तो सामान्य तौर पर पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़नी चाहिए थी। लेकिन आरोप है कि वाहन को जब्त करने और प्रकरण दर्ज करने के बजाय उसे छोड़ दिया गया।
यहीं से पूरा मामला संदिग्ध हो जाता है।
अगर डोडाचूरा नहीं था तो कार छोड़े जाने की वजह क्या थी? और यदि डोडाचूरा मिला था तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इन सवालों का जवाब अब जांच में तलाशना होगा।
लाखों के लेनदेन की चर्चा ने बढ़ाई हलचल
मामले में सबसे गंभीर चर्चा कथित आर्थिक लेनदेन को लेकर है। सूत्रों के हवाले से लाखों रुपए के लेनदेन की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इसकी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ऐसे में जांच का दायरा केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि कार क्यों छोड़ी गई, बल्कि यह भी सामने आना चाहिए कि कार में कौन था, वाहन में वास्तव में क्या मिला, किसने चेकिंग की, किस अधिकारी को इसकी जानकारी थी, वाहन को रोकने और छोड़ने के बीच क्या-क्या हुआ और क्या किसी ने पुलिसकर्मियों से संपर्क किया था।
एसपी तक पहुंची बात, फिर हुई कार्रवाई
घटना की जानकारी एसपी अमित कुमार तक पहुंचने के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में दोनों पुलिसकर्मियों के संदिग्ध आचरण की जानकारी सामने आने के बाद बुधवार शाम उन्हें लाइन अटैच कर दिया गया।
अब ग्रामीण एएसपी विवेक कुमार इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करेंगे। जानकारी के अनुसार जांच में कॉन्स्टेबल माखनसिंह से जुड़ी पूर्व की शिकायतों को भी शामिल किया जाएगा।

थाना प्रभारी ने ज्वाइन तक नहीं किया और विवाद सामने!
इस पूरे घटनाक्रम का समय भी सवाल खड़े करता है।
1 अक्टूबर को एसपी अमित कुमार ने 11 थाना प्रभारियों के तबादले किए थे। इनमें नामली थाना प्रभारी अमित कोरी का तबादला रतलाम के औद्योगिक क्षेत्र थाने किया गया था, जबकि रिंगनोद थाना प्रभारी आनंदसिंह आजाद को नामली थाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
लेकिन बताया जा रहा है कि आनंदसिंह आजाद ने अभी तक नामली थाने में ज्वाइन नहीं किया है। इसी बीच थाने में पदस्थ दो पुलिसकर्मियों पर डोडाचूरा से भरी कार को कथित रूप से छोड़ने का आरोप सामने आ गया।
अब असली सवाल जांच से होंगे साफ
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मादक पदार्थ से जुड़े मामले में यदि वाहन वास्तव में पकड़ा गया था, तो उसे छोड़ने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया?
क्या इसकी जानकारी तत्कालीन थाना प्रभारी या वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई थी?
क्या वाहन और उसमें सवार लोगों की पहचान दर्ज की गई?
क्या चेकिंग के दौरान कोई जब्ती या पंचनामा बनाया गया?
क्या सीसीटीवी फुटेज मौजूद है?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या वाहन छोड़ने के पीछे किसी तरह का आर्थिक दबाव या लेनदेन था?
इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट से ही सामने आएंगे।
एसपी अमित कुमार ने फिलहाल इसे विभागीय कार्रवाई बताते हुए कहा है कि दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है और मामले की जांच ग्रामीण एएसपी विवेक कुमार को सौंपी गई है।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं। क्योंकि मामला सिर्फ दो पुलिसकर्मियों के लाइन अटैच होने का नहीं है—मामला यह जानने का है कि डोडाचूरा से जुड़ी कथित कार्रवाई आखिर रास्ते में क्यों रोक दी गई और उस रात नामली पुलिस की चेकिंग में वास्तव में हुआ क्या था?