November 5, 2026 11:43 am

1,780 देवस्थानों की 4,622 हेक्टेयर जमीन का होगा हिसाब-किताब, अब खुलेगा राजस्व रिकॉर्ड का सच!

रतलाम जिले  में शासन प्रबंधित देवस्थानों की हजारों हेक्टेयर जमीन को लेकर प्रशासन ने अब बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिले के 1,780 शासन प्रबंधित देवस्थानों की 4,622.02 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों से मिलान कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का यह आदेश सामने आने के बाद देवस्थान की जमीनों के रिकॉर्ड, नामांतरण, कब्जे, अतिक्रमण और कथित अनियमित प्रविष्टियों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में देवस्थान भूमि के रिकॉर्ड अब तक किस स्थिति में रहे और क्या सभी जमीनों के राजस्व अभिलेख वास्तव में शासन के निर्धारित नियमों के अनुरूप दर्ज हैं?

प्रशासन अब खसरा, बी-1, नक्शे, पुराने राजस्व अभिलेख, देवस्थान पंजी और शासन स्तर से उपलब्ध सूची का आपस में मिलान करेगा। यानी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन और वास्तविक स्थिति के बीच यदि कहीं भी अंतर मिला तो उसकी पड़ताल की जाएगी।

पुजारी मालिक नहीं, देवता होंगे भूमिस्वामी

आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 6 सितंबर 2021 के निर्णय का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि मंदिर से संबद्ध भूमि के स्वामी अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं। केवल पुजारी होने के आधार पर किसी व्यक्ति को देवस्थान की जमीन पर व्यक्तिगत स्वामित्व या भूमिस्वामी अधिकार प्राप्त नहीं होता।

यही प्रावधान अब उन राजस्व प्रविष्टियों की जांच का आधार बनेगा, जिनमें देवस्थान की जमीन किसी पुजारी, व्यवस्थापक या निजी व्यक्ति के नाम दर्ज हो सकती है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सक्षम न्यायालय के विशिष्ट आदेश के अभाव में किसी निजी व्यक्ति का नाम व्यक्तिगत भूमिस्वामी के रूप में दर्ज नहीं रहना चाहिए।

अब सवाल—कहां-कहां बदली गई जमीन की तस्वीर?

जिले में हजारों हेक्टेयर देवस्थान भूमि होने के बावजूद अब प्रशासन रिकॉर्ड की वास्तविकता खंगालने जा रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कहीं देवस्थान की जमीन का नामांतरण हुआ? क्या कहीं जमीन बेची गई? क्या किसी जमीन पर कब्जा हुआ? क्या रिकॉर्ड में पुजारी या निजी व्यक्ति का नाम चढ़ा? क्या कहीं सरकारी रिकॉर्ड और मौके की स्थिति अलग है?

इन सवालों का जवाब अब राजस्व अभिलेखों के मिलान से सामने आने की उम्मीद है।

रतलाम में 623 देवस्थान, 1,730.50 हेक्टेयर जमीन

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रतलाम क्षेत्र में ही 623 शासन प्रबंधित देवस्थानों की 1,730.50 हेक्टेयर भूमि दर्ज है।

जावरा में 316 देवस्थानों की 791.01 हेक्टेयर, पिपलौदा में 319 देवस्थानों की 913.65 हेक्टेयर तथा आलोट में 291 देवस्थानों की 662.52 हेक्टेयर भूमि दर्ज है।

ताल में 154 देवस्थानों की 304.09 हेक्टेयर, सैलाना में 64 की 195.95 हेक्टेयर, बाजना में 2 की 2.36 हेक्टेयर तथा रावटी में 11 देवस्थानों की 21.94 हेक्टेयर भूमि दर्ज है।

इसके अलावा जिले के बाहर स्थित 41 देवस्थानों की भी 212.621 हेक्टेयर भूमि रतलाम जिले में मौजूद है।

अब हर देवस्थान की अलग फाइल तैयार होगी

प्रशासन प्रत्येक देवस्थान के संबंध में देवता अथवा देवस्थान का नाम, ग्राम, तहसील, वर्तमान राजस्व प्रविष्टि, पुजारी का नाम और वर्तमान खसरे की प्रति सहित अलग-अलग विवरण तैयार करवाएगा।

इसका मतलब साफ है—अब सिर्फ कागज पर दर्ज नाम ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की पूरी श्रृंखला जांच के दायरे में होगी।

अनधिकृत बिक्री या नामांतरण मिला तो तत्काल सूचना

कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि यदि किसी शासन प्रबंधित देवस्थान की भूमि में अनधिकृत विक्रय, नामांतरण, कब्जा, अतिक्रमण या राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटि सामने आती है तो तत्काल संबंधित एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय को सूचना दी जाए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस व्यापक सत्यापन में कितने देवस्थानों के रिकॉर्ड सही मिलते हैं और कितने मामलों में राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी सामने आती है।

असली परीक्षा अब रिकॉर्ड की है

प्रशासन ने जांच के आदेश तो जारी कर दिए हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 4,622.02 हेक्टेयर देवस्थान भूमि की जांच के बाद सामने आने वाली गड़बड़ियों पर कार्रवाई कितनी तेजी से होती है?

क्या वर्षों से चली आ रही संदिग्ध प्रविष्टियां सुधरेंगी?
क्या अनधिकृत नामांतरण रद्द होंगे?
क्या कब्जाधारियों पर कार्रवाई होगी?
और सबसे अहम—देवस्थान की जमीन आखिर देवस्थान के पास ही सुरक्षित रहेगी या फिर रिकॉर्ड की धूल में दबे पुराने मामले एक-एक करके बाहर आएंगे?

अब प्रशासन की यह कार्रवाई सिर्फ रिकॉर्ड मिलान नहीं, बल्कि देवस्थान संपत्ति की वास्तविक स्थिति का बड़ा परीक्षण बन गई है।

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