November 5, 2026 11:49 am

रिंगनोद में जन विश्वास शिविर: कलेक्टर के सामने उठेंगे भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के मुद्दे, जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?

 

जेडी बैरागी वैष्णव- रतलाम जिले की जावरा जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत रिंगनोद में 16 अक्टूबर शुक्रवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर का आयोजन होगा। शिविर में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहेंगे। ग्रामीणों को अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रखने का अवसर मिलेगा। लेकिन रिंगनोद में इस शिविर के दौरान केवल आम समस्याएं ही नहीं, बल्कि कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक कार्रवाई में देरी को लेकर भी तीखे सवाल उठने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, जिला पंचायत सदस्य डीपी धाकड़ से जुड़े कथित फर्जी राशन कार्ड का मामला भी शिविर में उठ सकता है। बताया जा रहा है कि इस मामले में FIR दर्ज करने के आदेश होने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यदि आदेश के बाद भी कार्रवाई लंबित है, तो इसकी वजह क्या है? संबंधित अधिकारियों ने अब तक क्या कदम उठाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? ग्रामीणों की ओर से इन सवालों पर प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा जा सकता है।

FIR के आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?

ग फर्जी राशन कार्ड के कथित मामले में कार्रवाई के आदेश के बावजूद यदि अब तक FIR दर्ज नहीं हुई है, तो यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ? क्या संबंधित विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई या मामला फाइलों में ही उलझा हुआ है? इस पूरे प्रकरण में प्रशासन की जवाबदेही तय होना जरूरी है। ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यो का भी भोतिक सत्यापन होना आवश्यक है।

ग्रामीणों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि कलेक्टर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं और लंबित कार्रवाई को लेकर कोई ठोस निर्देश देते हैं या नहीं।

सरपंच यूसुफ खान के कथित अतिक्रमण पर भी घिरेगा प्रशासन?

रिंगनोद में ग्राम पंचायत के सरपंच यूसुफ खान के मकान से जुड़े कथित अतिक्रमण का मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि गौचर भूमि पर अतिक्रमण हटाने के आदेश होने के बावजूद अब तक जमीन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया। जो तहसीलदार पॉलिटेक्निक कालेज की जमीन से निजी फेक्ट्री को रास्ता दिलवा सकते है। वो सरपंच के मकान जो गौचर भूमि में बना है उस पर अतिक्रमण कब हटाते है ये देखना रोचक होगा।

रिंगनोद में जन विश्वास शिविर: कलेक्टर के सामने उठेंगे भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के मुद्दे, जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?

यदि अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी हुए थे, तो उनका पालन अब तक क्यों नहीं हुआ? क्या राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की? यदि नहीं, तो देरी के लिए जवाबदेह कौन है? उस पर कार्रवाई कब होगी।

गौचर भूमि का संरक्षण ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के चरने और सामुदायिक उपयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस मामले में प्रशासन को आदेशों की स्थिति, भूमि के रिकॉर्ड और अब तक की गई कार्रवाई का स्पष्ट ब्योरा देना चाहिए।

जिन कॉलोनियों पर रोक, उन्हीं में प्लॉटों के नामांतरण कैसे हुए?

रिंगनोद में कुछ कॉलोनियों पर कलेक्टर द्वारा रोक लगाए जाने के बावजूद उन्हीं कॉलोनियों के कुछ भूखंडों के नामांतरण होने की बात भी सवालों के घेरे में है। यदि संबंधित कॉलोनियों में किसी प्रकार की रोक प्रभावी थी, तो उसके बावजूद नामांतरण किस आधार पर किए गए? और जब हुए तो शिकायत क्यो हुई मतलब दाल में कुछ काला नही दाल ही काली है।

क्या नामांतरण के समय प्रतिबंधात्मक आदेशों की जांच की गई थी? क्या संबंधित अधिकारियों को रोक के आदेशों की जानकारी थी? क्या नामांतरण नियमों के अनुरूप हुए या उनमें किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई?

इन सवालों का जवाब राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों और प्रशासन को दस्तावेजों के आधार पर देना होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इन मामलों में सरपंच और सचिव की क्या भूमिका रही तथा जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आने पर क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।

जन विश्वास शिविर में जनता के सवालों का मिलेगा जवाब या फिर आश्वासनों तक सीमित रहेगी कार्रवाई?

मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत करना है। लेकिन  जहां शिविर लगेगा उसी रिंगनोद में उठ रहे इन सवालों का जवाब केवल आश्वासनों से नहीं मिलेगा। ग्रामीणों को यह जानना है कि जिन मामलों में कार्रवाई के आदेश होने की बात कही जा रही है, उनमें अब तक क्या हुआ और आगे की कार्रवाई की समयसीमा क्या होगी।

अब निगाहें शुक्रवार को होने वाले शिविर पर टिकी हैं। क्या कलेक्टर इन मामलों की वास्तविक स्थिति सामने रखेंगे? क्या संबंधित विभागों से रिकॉर्ड तलब कर जवाबदेही तय होगी? क्या कथित अतिक्रमण हटाने और कॉलोनियों में हुए नामांतरण की जांच के निर्देश जारी होंगे?

रिंगनोद के ग्रामीणों को अब केवल आदेशों की जानकारी नहीं, बल्कि उन आदेशों का जमीन पर पालन भी चाहिए। शिविर में प्रशासन इन सवालों पर क्या रुख अपनाता है, यह देखना अहम होगा।

 

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