November 6, 2026 4:19 pm

जावरा नगर पालिका की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल! परिसर के सुलभ शौचालय से दरवाजे गायब, कुंडियां भी नहीं बचीं… सामने लगा CCTV कैमरा भी लापता!

रतलाम जिले की जावरा नगर पालिका परिषद एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला किसी सड़क, नाली या निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि सीधे नगर पालिका परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी संपत्ति की निगरानी से जुड़ा है। नगर पालिका परिसर में स्थित सुलभ शौचालय से दरवाजे और कुंडियां गायब होने की बात सामने आई है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि शौचालय के ठीक सामने निगरानी के लिए लगाया गया CCTV कैमरा भी अब मौके से गायब है।

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एक ही परिसर में सरकारी संपत्ति का गायब होना और उसी स्थान की निगरानी करने वाला कैमरा भी लापता हो जाना अब कई सवालों को जन्म दे रहा है। आखिर दरवाजे कब गायब हुए? कुंडियां किसने निकालीं? CCTV कैमरा कब और कैसे गायब हुआ? क्या नगर पालिका प्रशासन को इसकी जानकारी थी? अगर जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं थी तो फिर नगर पालिका परिसर की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

इन सवालों का जवाब अब नगर पालिका प्रशासन को देना होगा।

दरवाजे गायब… कुंडी गायब… और CCTV भी नहीं मिला—यह कैसी सुरक्षा व्यवस्था?

स्थानीय स्तर पर सामने आए मामले के अनुसार नगर पालिका परिसर में स्थित सुलभ शौचालय के दरवाजे गायब पाए गए हैं। दरवाजों के साथ उनकी नकुची यानी कुंडियां भी नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या यह सामान अचानक गायब हो गया या फिर किसी ने योजनाबद्ध तरीके से इसे निकालकर ले जाया?

मामला यहीं खत्म नहीं होता। जिस स्थान पर यह शौचालय स्थित है, उसके सामने निगरानी के लिए CCTV कैमरा भी लगाया गया था। लेकिन अब वह कैमरा भी मौके पर नजर नहीं आ रहा है। यदि CCTV कैमरा चालू था तो चोरी या सामान गायब होने की घटना की रिकॉर्डिंग सामने आनी चाहिए थी। यदि कैमरा बंद था तो उसकी निगरानी कौन कर रहा था? और यदि कैमरा ही गायब हो गया तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है?

नगर पालिका परिसर से सरकारी संपत्ति गायब होने की घटनाएं यदि लगातार हो रही हैं तो यह केवल चोरी का मामला नहीं, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है।

स्थानीय लोगों का आरोप—बिना मिलीभगत के कैसे हो रही चोरी?

  1. घटना को लेकर स्थानीय नागरिकों में भी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि नगर पालिका परिसर में सरकारी सामान के गायब होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि परिसर में चौकीदार और सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद यदि सामान गायब हो रहा है, तो यह जांच का विषय है।

कुछ स्थानीय लोगों ने तो यहां तक सवाल उठाया है कि आखिर नगर पालिका परिसर में बाहरी व्यक्ति इतनी आसानी से कैसे प्रवेश कर सकता है और वहां से सरकारी सामान लेकर निकल सकता है? यदि किसी व्यक्ति ने दरवाजे और कुंडियां निकालीं तो क्या किसी कर्मचारी या सुरक्षा कर्मी ने उसे देखा नहीं? क्या रात के समय परिसर में निगरानी की व्यवस्था नहीं है?

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से मामला सामने आया है, उससे लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं जरूर पैदा हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी संपत्ति आखिर किस परिस्थिति में गायब हुई।

चौकीदार की भूमिका पर भी सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

नगर पालिका परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिस व्यवस्था के तहत तय है, उसकी भी समीक्षा की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों ने चौकीदार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि परिसर में सुरक्षा कर्मी तैनात है, तो फिर सरकारी सामान की चोरी या गायब होने की घटनाएं कैसे हो रही हैं?

हालांकि, किसी भी कर्मचारी या चौकीदार पर सीधे आरोप लगाने से पहले जांच जरूरी है। यही वजह है कि स्थानीय नागरिकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में जांच कराई जाए। जांच में यह भी देखा जाए कि CCTV कैमरा कब से गायब है, वह किस स्थिति में था, उसकी देखरेख किसके जिम्मे थी और घटना के समय ड्यूटी पर कौन-कौन कर्मचारी मौजूद थे।

CMO ने दिया जांच का आश्वासन, लेकिन कार्रवाई कब होगी?

मामले को लेकर जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी यानी CMO से चर्चा की गई तो उन्होंने मामले की जांच कराने और वास्तविक स्थिति का पता लगाने का आश्वासन दिया। लेकिन सवाल यह है कि जांच कब शुरू होगी और उसका नतीजा कब सामने आएगा?

सरकारी संपत्ति से जुड़े मामलों में केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यदि वास्तव में नगर पालिका परिसर से सामान चोरी हुआ है तो जिम्मेदारों की पहचान होना चाहिए। यदि सामान चोरी नहीं हुआ और किसी अन्य कारण से हटाया गया है तो उसका रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।

लोगों की मांग है कि नगर पालिका प्रशासन को मामले में स्पष्टता लानी चाहिए और जनता को बताना चाहिए कि सुलभ शौचालय के दरवाजे और कुंडियां कहां गईं तथा CCTV कैमरे का क्या हुआ।

लगातार चोरी की घटनाओं से लोगों में भय और नाराजगी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका परिसर जैसी जगह, जहां आम जनता का आना-जाना रहता है और जहां सरकारी संपत्ति रखी जाती है, वहां यदि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका अपनी ही संपत्ति की सुरक्षा नहीं कर पा रही है तो आम नागरिकों की सुरक्षा और सरकारी संसाधनों की निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब देखना यह होगा कि नगर पालिका प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी जांच के आश्वासन तक ही सीमित रह जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल यही है—नगर पालिका परिसर में आखिर किसकी निगरानी चल रही है?

जहां CCTV होना चाहिए, वहां कैमरा गायब है।
जहां दरवाजे होने चाहिए, वहां दरवाजे गायब हैं।
जहां कुंडियां लगी होनी चाहिए, वहां कुंडियां तक नहीं हैं।
और जहां सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, वहां लगातार चोरी के आरोप सामने आ रहे हैं।

अब सवाल सिर्फ कुछ दरवाजों और कुंडियों का नहीं है। सवाल है नगर पालिका की सुरक्षा व्यवस्था, सरकारी संपत्ति की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने का।

यदि जांच में चोरी की पुष्टि होती है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो जवाबदेही तय की जानी चाहिए। और यदि CCTV कैमरा जानबूझकर हटाया गया है, तो यह पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।

जावरा नगर पालिका प्रशासन से अब जनता जवाब चाहती है—आखिर सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और नगर पालिका परिसर में हो रही इन घटनाओं पर कार्रवाई कब होगी?

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