November 5, 2026 12:19 pm

रतलाम को मिला नया कलेक्टर,IAS अजय कटेसरिया संभालेंगे जिले की कमान, मिशा सिंह शहडोल कलेक्टर

रतलाम मध्यप्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में शुक्रवार देर रात उस वक्त बड़ा फेरबदल देखने को मिला, जब शासन ने 20 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों की बहुप्रतीक्षित तबादला सूची जारी कर दी। तबादला सूची में प्रदेश के 6 जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल का सबसे बड़ा असर रतलाम जिले पर पड़ा है, जहां अब 2012 बैच के IAS अधिकारी अजय कटेसरिया जिले की कमान संभालेंगे।

रतलाम की मौजूदा कलेक्टर मिशा सिंह का तबादला कर उन्हें शहडोल कलेक्टर बनाया गया है। वहीं, रतलाम की नई प्रशासनिक कमान अब अजय कटेसरिया के हाथों में होगी। पिछले कई दिनों से रतलाम कलेक्टर के तबादले को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म था। आखिरकार शुक्रवार देर रात शासन की सूची जारी होते ही इन अटकलों पर विराम लग गया।

अब अजय कटेसरिया के सामने रतलाम की बड़ी चुनौतियां

नए कलेक्टर अजय कटेसरिया के सामने रतलाम जिले में कई बड़ी चुनौतियां होंगी। जिले में कानून-व्यवस्था, अवैध खनन, नशे के बढ़ते कारोबार, भूमाफिया, सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण, यातायात व्यवस्था और आम जनता की शिकायतों के त्वरित निराकरण जैसे मुद्दे प्रशासन की प्राथमिक परीक्षा लेने वाले होंगे।

रतलाम में हाल के वर्षों में प्रशासन के सामने कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन पर जनता की नजर लगातार बनी हुई है। ऐसे में नए कलेक्टर से आम लोगों को उम्मीद रहेगी कि वे केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित प्रशासन के बजाय जमीनी स्तर पर सक्रिय और जवाबदेह प्रशासन की मिसाल कायम करें।

जनसुनवाई और तकनीक आधारित प्रशासन पर जोर के लिए पहचाने जाते हैं कटेसरिया

11 अगस्त 1981 को जन्मे अजय कटेसरिया मूलतः झारखंड के निवासी बताए जाते हैं। उन्होंने कॉमर्स विषय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और 3 सितंबर 2012 को भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्त हुए। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों और महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां संभालीं।

रतलाम पदस्थापना से पहले वे सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत थे। इसके साथ ही उनके पास मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी था।

प्रशासनिक हलकों में उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में बताई जाती है, जो आम नागरिकों से सीधे संवाद, प्रभावी जनसुनवाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर देते हैं। सतना और शाजापुर में कलेक्टर के रूप में कार्यकाल के दौरान भी उनके प्रशासनिक कामकाज को लेकर चर्चा रही है।

अब रतलाम में उनकी नई पारी शुरू होने जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नए कलेक्टर रतलाम की जटिल प्रशासनिक चुनौतियों पर सख्त और निर्णायक कार्रवाई करेंगे?

मिशा सिंह की शहडोल में नई जिम्मेदारी

रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह को अब शहडोल जिले की कमान सौंपी गई है। उनके तबादले के साथ ही रतलाम प्रशासन में एक और बदलाव हुआ है। अब नए कलेक्टर के सामने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने के साथ-साथ पूर्व में लंबित मामलों और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती होगी।

कुमार पुरुषोत्तम को बड़ी जिम्मेदारी, CM के अपर सचिव भी बने

तबादला सूची में रतलाम के पूर्व कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के सचिव के साथ ही मुख्यमंत्री के अपर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कुमार पुरुषोत्तम का रतलाम कलेक्टर के रूप में कार्यकाल काफी चर्चित रहा था। अब नई जिम्मेदारी के साथ वे सीधे शासन के महत्वपूर्ण प्रशासनिक तंत्र का हिस्सा होंगे। मंडी बोर्ड की जिम्मेदारी के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर सचिव का दायित्व मिलना उनकी प्रशासनिक भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाता है।

रतलाम के पूर्व कलेक्टर भास्कर लक्षकार को इंदौर की कमान

तबादला सूची में रतलाम से जुड़ा एक और बड़ा नाम सामने आया है। रतलाम के पूर्व कलेक्टर भास्कर लक्षकार को अब इंदौर संभाग का आयुक्त (कमिश्नर) नियुक्त किया गया है।

इस तरह एक ही तबादला सूची में रतलाम से जुड़े तीन IAS अधिकारियों की नई जिम्मेदारियां चर्चा में आ गई हैं—अजय कटेसरिया रतलाम के नए कलेक्टर, मिशा सिंह शहडोल की कलेक्टर और भास्कर लक्षकार इंदौर संभाग के कमिश्नर बनाए गए हैं, जबकि पूर्व रतलाम कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम को भी शासन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।

अब देखना होगा—नए कलेक्टर का पहला एक्शन क्या होगा?

रतलाम में नए कलेक्टर की नियुक्ति के बाद अब जिले की जनता की निगाहें अजय कटेसरिया पर टिक गई हैं। जिले में अवैध खनन और नशे के कारोबार से लेकर भूमाफियाओं और प्रशासनिक शिकायतों तक कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर जनता लंबे समय से सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।

अब सवाल सिर्फ नए कलेक्टर की नियुक्ति का नहीं, बल्कि नई प्रशासनिक कार्यशैली का है। क्या अजय कटेसरिया रतलाम में भ्रष्टाचार और माफिया तंत्र पर शिकंजा कसेंगे? क्या जनसुनवाई को प्रभावी बनाकर आम आदमी की आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचाएंगे? और क्या जिले की जमीनी समस्याओं पर त्वरित फैसले लेकर अपनी अलग पहचान बनाएंगे?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। फिलहाल रतलाम में सत्ता और प्रशासन के गलियारों में एक ही चर्चा है—नए कलेक्टर की एंट्री के साथ क्या जिले के प्रशासनिक सिस्टम में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?

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