रतलाम के जावरा पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों के ज्ञान, अभिव्यक्ति-कौशल एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अंतर-सदनीय भाषण प्रतियोगिता का आयोजन उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया। प्रतियोगिता में कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों ने विद्यालय के चारों सदनों—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद—का प्रतिनिधित्व करते हुए बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
प्रतियोगिता का केंद्रीय विषय अत्यंत समसामयिक एवं प्रेरणादायी रहा—“विकसित भारत 2047 एवं विकसित भारत के निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका”। विद्यार्थियों ने हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। अपने भाषणों के माध्यम से विद्यार्थियों ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना, तकनीकी प्रगति, नवाचार, शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, प्रशासन तथा दैनिक जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए।
नन्हे वक्ताओं ने यह संदेश भी दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल आधुनिक तकनीक नहीं, बल्कि सही दिशा और जिम्मेदारी के साथ उपयोग किया जाए तो यह भारत के विकास की गति को कई गुना बढ़ाने वाला सशक्त माध्यम बन सकता है। विद्यार्थियों की तथ्यपूर्ण प्रस्तुति, आत्मविश्वास, भाषा-शैली, विचारों की स्पष्टता एवं मंच संचालन क्षमता ने सभी को प्रभावित किया।
प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में कोऑर्डिनेटर श्री भरत सोनी सर एवं श्रीमती यामिनी जोशी ने विद्यार्थियों के भाषणों का मूल्यांकन किया। दोनों निर्णायकों ने विद्यार्थियों की विषय पर पकड़, अभिव्यक्ति, उच्चारण, आत्मविश्वास एवं प्रस्तुति शैली को ध्यानपूर्वक परखा।
प्रतियोगिता के परिणाम को लेकर विद्यार्थियों में विशेष उत्सुकता बनी हुई है। प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा 15 अगस्त 2026, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर की जाएगी। इस घोषणा से विद्यार्थियों का उत्साह और भी बढ़ गया है।
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इस अवसर पर विद्यालय के डायरेक्टर श्री कमल मूणत ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि मंच पर अपने विचारों को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना स्वयं में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही 2047 के भारत के निर्माता होंगे और ज्ञान, तकनीक, संस्कार तथा राष्ट्रप्रेम के समन्वय से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. पीयूष मूणत ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में वक्तृत्व-कला, तार्किक चिंतन, आत्मविश्वास, समसामयिक जागरूकता एवं नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं।
कार्यक्रम का समापन इस प्रेरणादायी संकल्प के साथ हुआ कि “आज की युवा सोच, कल के विकसित भारत की नींव है।”