November 5, 2026 11:56 am

मेरे सपनों का भारत’ में गूंजा विकसित भारत का संकल्प, जे.पी.एस. में 70 विद्यार्थियों ने रंगों से और 20 ने भाषण से बताई भारत के भविष्य की तस्वीर

रतलाम के जावरा में JPS स्कूल ने बताया अगला भारत कैसा हो? शिक्षा में आगे, विज्ञान और तकनीक में आत्मनिर्भर, पर्यावरण के प्रति सजग और युवाओं की ताकत से दुनिया में नई पहचान बनाने वाला भारत—इन्हीं सपनों और संकल्पों की गूंज जावरा पब्लिक स्कूल में सुनाई दी। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित “मेरे सपनों का भारत” कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भाषण और चित्रकला के जरिए विकसित भारत की अपनी कल्पना को खुलकर सामने रखा।

कार्यक्रम महज एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा। विद्यार्थियों ने अपने विचारों और रचनात्मकता के माध्यम से यह बताने की कोशिश की कि देश के भविष्य को लेकर नई पीढ़ी क्या सोचती है और भारत को किस दिशा में आगे बढ़ते देखना चाहती है।

 70 विद्यार्थियों ने रंगों में उतारा अपने सपनों का भारत

चित्रकला प्रतियोगिता में करीब 70 विद्यार्थियों ने भाग लिया। किसी ने शिक्षा और तकनीक को भारत की ताकत बताया तो किसी ने पर्यावरण संरक्षण, स्वावलंबन, राष्ट्रप्रेम और युवा शक्ति को विकसित भारत की बुनियाद के रूप में चित्रित किया।

वहीं 20 विद्यार्थियों ने भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका और जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे।

 मंच से उठा ‘इंडिया फर्स्ट’ का संदेश

कार्यक्रम में भाजपा नेता  प्रांजल पाण्डेय,  प्रतीक रावल एवं गौरव सोनी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

शिक्षा विभाग की ओर से बीआरसीसी जावरा रूपेश नारोटे, बीएसई जावरा राजेश भावसार,  मुकेश देवड़ा एवं  महावीर भंडारी सहित विद्यालय परिवार और शिक्षकगण मौजूद रहे।

विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. पीयूष मूणत ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में केवल प्रतिस्पर्धा की भावना नहीं जगाते, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी, सेवा भावना और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से प्रांजल पाण्डेय के उद्बोधन का उल्लेख करते हुए बताया कि पाण्डेय ने विद्यार्थियों के बीच “इंडिया फर्स्ट” यानी प्रत्येक कार्य में राष्ट्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

 सवाल सिर्फ सपना देखने का नहीं, उसे साकार करने का है

“मेरे सपनों का भारत” के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि विकसित भारत का सपना केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा, अनुशासन, सेवा, जिम्मेदारी, रचनात्मक सोच और राष्ट्रहित को जीवन का हिस्सा बनाकर नई पीढ़ी इस दिशा में अपनी भूमिका निभा सकती है।

कार्यक्रम में अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और उत्साह की सराहना करते हुए उन्हें लगातार सीखने और रचनात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

 जे.पी.एस. में दिखा नई पीढ़ी का विजन

करीब 70 चित्रों और 20 भाषणों के जरिए विद्यार्थियों ने अपने-अपने तरीके से उस भारत की तस्वीर पेश की, जिसे वे भविष्य में देखना चाहते हैं।

कार्यक्रम का माहौल राष्ट्रप्रेम, उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा से भरा रहा। विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

संदेश साफ है—विकसित भारत का सपना जितना बड़ा होगा, उसे साकार करने की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होगी। और इस जिम्मेदारी को लेकर नई पीढ़ी की आवाज अब स्कूलों के मंच से भी साफ सुनाई देने लगी है।

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