रतलाम जिले के जावरा नगर पालिका परिषद का विशेष सम्मेलन शुरू होते ही विकास कार्यों को लेकर विपक्षी पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। सड़क, नाली, डामरीकरण, अमृत-2.0 और गैस पाइपलाइन के नाम पर शहर की सड़कों की खुदाई जैसे मुद्दों को लेकर पार्षदों ने जमकर सवाल उठाए। हालात ऐसे बने कि सम्मेलन का माहौल शुरुआत से ही हंगामेदार नजर आया।
सबसे अलग और तीखा विरोध पार्षद पिंकी यादव ने दर्ज कराया। अपने वार्ड में लंबे समय से निर्माण कार्य नहीं होने का आरोप लगाते हुए वे कुर्सी पर बैठने के बजाय जमीन पर बैठ गईं। उनका आरोप था कि इंदिरा कॉलोनी में पिछले चार वर्षों से सड़क के डामरीकरण का काम नहीं हुआ है। उन्होंने विरोध स्वरूप सम्मेलन में अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
‘चार साल से सड़क नहीं, फिर विकास कहां है?’
पिंकी यादव के विरोध ने सदन में विकास कार्यों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना था कि यदि वार्ड की मूलभूत समस्याओं का समाधान ही नहीं हो रहा तो जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखने के अलावा रास्ता क्या बचता है?
वहीं पार्षद अनिल मोदी ने भी अपने वार्ड की कथित उपेक्षा का मुद्दा उठाया। जवाब में सीएमओ चंद्रशेखर सोनिस ने उनके वार्ड की सड़क के एक हिस्से को सीसी रोड बनाने की बात कही।
अमृत-2.0 और गैस पाइपलाइन की खुदाई पर घिरी नपा
सम्मेलन में पार्षद रजत सोनी और शिवेंद्र माथुर ने अमृत-2.0 योजना और गैस पाइपलाइन के ठेकेदार द्वारा शहर की सड़कों की जा रही खुदाई का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया।
पार्षद शिवेंद्र माथुर ने चौपाटी रोड का उदाहरण देते हुए कहा कि सड़क की हालत खराब होने से आम लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। सवाल यह उठाया गया कि विकास योजनाओं के नाम पर सड़कों को खोदने के बाद उनकी मरम्मत और जवाबदेही सुनिश्चित कौन करेगा?
बिना अनुमति सड़क खोद दी, नपा को पता तक नहीं?
मामले में सीएमओ ने स्वयं स्वीकार किया कि ठेकेदार द्वारा नगर पालिका सीमा में बिना अनुमति सड़क की खुदाई की गई। यह स्वीकारोक्ति सामने आते ही ठेकेदार और नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल और तीखे हो गए।

एल्डरमैन अजय भाटी ने कहा कि टेंडर निरस्त करना नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, इसलिए ठेकेदार को डिमांड लेटर जारी कर नियमानुसार राशि की वसूली की जानी चाहिए।
सीएमओ ने पूरे मामले की जांच के लिए एक दल गठित करने की बात कही है, जो सड़क खुदाई से जुड़े मामले की जांच करेगा।
समय पर सम्मेलन नहीं, जनहित के मुद्दे कहां उठेंगे?
एल्डरमैन नंदकिशोर महावर ने विशेष सम्मेलन निर्धारित समय पर नहीं बुलाए जाने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि उनकी पार्टी के पार्षद सड़क, नाली सहित जनहित के मुद्दों को सदन में रखना चाहते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
वहीं पार्षद कालू कदम ने नल कनेक्शन से जुड़े विषय को उठाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी बात को अपेक्षित तवज्जो नहीं मिल सकी।
कुल मिलाकर विशेष सम्मेलन ने नगर पालिका के विकास कार्यों की तस्वीर पर कई सवाल खड़े कर दिए। कहीं चार साल से सड़क का इंतजार, कहीं खुदी हुई सड़कें, कहीं नाली की समस्या और कहीं योजनाओं के नाम पर हो रही खुदाई इन मुद्दों ने सदन का माहौल गर्माए रखा।
अब बड़ा सवाल यही है कि सदन में उठे इन सवालों का समाधान कब होगा और शहर की सड़कों व मूलभूत सुविधाओं को लेकर जिम्मेदारी आखिर तय कौन करेगा?