जेडी बैरागी वैष्णव, शुभदर्शन TV न्यूज़ चैनल—मध्यप्रदेश की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो गरीबी, अभाव और संसाधनों की कमी भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकती। अलीराजपुर जिले की जोबट तहसील के एक साधारण किसान परिवार के दो बेटों ने ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसकी गूंज अब पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। जावरा औद्योगिक थाना प्रभारी प्रकाश गाडरिया और रावटी थाना प्रभारी सुरेंद्र गाडरिया का उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) पद पर चयन हुआ है।
यह केवल दो अधिकारियों की पदोन्नति नहीं, बल्कि संघर्ष, तपस्या और अथक मेहनत की जीत है। यह उन लाखों ग्रामीण युवाओं के लिए संदेश है जो संसाधनों की कमी को अपनी असफलता का कारण मान लेते हैं।
1000 रुपये की नौकरी से शुरू हुआ सफर, डीएसपी की कुर्सी तक पहुंचे
प्रकाश गाडरिया ने वर्ष 1998 में मात्र 1000 रुपये मासिक वेतन पर गुरुजी (शिक्षक) के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपने सपनों को मरने नहीं दिया।
वर्ष 2001 में वे संविदा शिक्षक बने, लेकिन नौकरी के साथ-साथ उन्होंने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) की तैयारी जारी रखी। दो बार मुख्य परीक्षा तक पहुंचने के बावजूद असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया।
संघर्ष इतना कि घर तक छोड़ना पड़ा
तैयारी के दौरान आर्थिक परेशानियां इतनी बढ़ गईं कि उन्हें घर से दूर रहकर संघर्ष करना पड़ा। न कोई बड़ी कोचिंग, न महंगे संसाधन और न ही किसी प्रकार की विशेष सुविधा, लेकिन लक्ष्य स्पष्ट था—वर्दी पहनकर समाज की सेवा करना। आखिरकार वर्ष 2006 में उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन उप निरीक्षक (एसआई) पद पर हुआ। वर्ष 2007 में प्रशिक्षण के बाद भोपाल में उनकी पहली पदस्थापना हुई।
ईमानदारी, निष्पक्षता और जनसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें पुलिस विभाग में एक अलग पहचान दिलाई और आज वही अधिकारी डीएसपी पद तक पहुंच गए हैं।
बड़े भाई की सफलता बनी छोटे भाई की प्रेरणा
बड़े भाई प्रकाश गाडरिया की सफलता से प्रेरित होकर छोटे भाई सुरेंद्र गाडरिया ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। दोनों भाइयों ने साथ बैठकर तैयारी की और संघर्ष को अपनी ताकत बनाया।
सुरेंद्र गाडरिया का भी चयन उप निरीक्षक (एसआई) के रूप में हुआ और उन्होंने अपनी कार्यशैली से पुलिस विभाग में अलग पहचान बनाई। वर्तमान में वे रावटी थाना प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं और अब उनका चयन भी डीएसपी पद पर हो गया है।
एक किसान परिवार के दो बेटे बने डीएसपी, प्रदेश में बना रिकॉर्ड जैसा उदाहरण
एक साधारण किसान परिवार से निकलकर दो बेटों का डीएसपी बनना केवल परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे अलीराजपुर, रतलाम और मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
यह कहानी बताती है कि—
गरीबी सपनों की दुश्मन नहीं होती।
असफलता मंजिल का अंत नहीं, सफलता की तैयारी होती है।
मेहनत और धैर्य का कोई विकल्प नहीं होता।
गांव का बेटा भी प्रदेश की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंच सकता है।
युवाओं के लिए संदेश
आज जब कई युवा पहली असफलता के बाद अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं, तब गाडरिया बंधुओं की यह सफलता एक जोरदार संदेश देती है कि “यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो परिस्थितियां नहीं बल्कि संकल्प जीतता है।”
क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल
जावरा, रावटी, अलीराजपुर और पूरे रतलाम जिले में इस उपलब्धि को लेकर खुशी की लहर है। पुलिस विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आम नागरिक दोनों अधिकारियों को बधाई दे रहे हैं।
दोनों भाइयों की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह साबित करेगी कि खेतों की मिट्टी से निकलने वाले हाथ भी एक दिन प्रशासन और कानून व्यवस्था की कमान संभाल सकते हैं।
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