November 5, 2026 12:06 pm

संत पं. कमल किशोरजी नागर को धमकी भरा पत्र मिलने से हड़कंप, सुरक्षा बढ़ाने की मांग

रतलाम के जावरा में भी परम पूज्य संत श्री पं. कमल किशोरजी नागर को कथित रूप से धमकी भरा पत्र मिलने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। संत की सुरक्षा को लेकर जावरा में चिंता का माहौल है। श्रीमद् भागवत कथा समिति जावरा एवं सर्व हिन्दू समाज तहसील जावरा की ओर से मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने और संत की सुरक्षा व्यवस्था तत्काल मजबूत करने की मांग की गई।
ज्ञापन में बताया गया कि 4 सितंबर 2026 को श्री गुरु कृपा शबरी गौशाला, भूराडाबरा, जिला झाबुआ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के अवसर पर रात्रिकालीन भव्य सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे। इसी दौरान श्रद्धालुओं द्वारा भेंट स्वरूप दी गई सामग्री, शाल एवं श्रीफल आदि के बीच कथित तौर पर एक धमकी भरा पत्र मिलने की बात सामने आई।
पत्र मिलने के बाद सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल
ज्ञापन में कहा गया कि पत्र की भाषा और विषयवस्तु को देखते हुए मामला गंभीर है तथा इससे संत की सुरक्षा को लेकर चिंता उत्पन्न हुई है। आवेदनकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि पत्र को महज सामान्य मामला न मानते हुए इसकी सूक्ष्म, निष्पक्ष और गंभीर जांच कराई जाए।
ज्ञापन में पत्र भेजने अथवा रखने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान करने, पत्र की परिस्थितियों की जांच करने तथा जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
धर्मांतरण और गौ संरक्षण के मुद्दों पर सक्रियता का भी उल्लेख
ज्ञापन में संत पं. कमल किशोरजी नागर द्वारा धर्मांतरण एवं गौ-तस्करी जैसी गतिविधियों के विरुद्ध जनजागरण तथा गौ संरक्षण से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहने का उल्लेख किया गया है। आवेदनकर्ताओं का कहना है कि क्षेत्र में धार्मिक एवं सामाजिक जनजागरण के बड़े आयोजन लगातार होते रहे हैं और इसी पृष्ठभूमि में संत को कथित धमकी वाला पत्र मिलना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय है।
“सुरक्षा पर तुरंत निर्णय लें प्रशासन”
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से संत पं. कमल किशोरजी नागर की सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में तत्काल निर्णय लेने की मांग की गई है। साथ ही प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेकर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि मामले में गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई और संत की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन एवं प्रदर्शन किया जाएगा। ज्ञापनकर्ताओं ने कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन के साथ कथित रूप से प्राप्त धमकी भरे पत्र की छायाप्रति भी संलग्न की गई है। अब पूरे मामले में प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर लोगों की नजरें टिकी हैं।
मुख्य सवाल यह है कि संत को धमकी भरा पत्र आखिर किसने और किस उद्देश्य से भेजा? पत्र की वास्तविकता क्या है और इसके पीछे कौन है? इन सवालों का जवाब अब पुलिस एवं प्रशासन की निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा।

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