रतलाम जिले की जावरा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए जा रहे प्रयास अब धरातल पर बड़े परिणाम देने लगे हैं। वर्षों तक गंभीर मरीजों को इंदौर, उज्जैन या रतलाम रेफर किए जाने वाला जावरा सिविल अस्पताल अब जटिल ऑपरेशन करने में सक्षम हो चुका है। इसका ताजा उदाहरण अस्पताल में सफलतापूर्वक किए गए जटिल कूल्हा प्रत्यारोपण (हिप रिप्लेसमेंट) के रूप में सामने आया है, जिसने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई पहचान दिलाई है।
इस उपलब्धि के पीछे विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय के लगातार प्रयासों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और आवश्यक संसाधनों के विस्तार के कारण अब ऐसे ऑपरेशन संभव हो रहे हैं, जिनके लिए पहले मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था।
इस उपलब्धि में बोहरा समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। समाज ने अपने धर्मगुरु के माध्यम से अस्थि रोग विभाग के लिए करीब 10 लाख रुपये मूल्य के आधुनिक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराए। इन्हीं उपकरणों के स्थापित होने के बाद जावरा सिविल अस्पताल में जटिल अस्थि शल्य चिकित्सा की शुरुआत हुई और अब उसका सफल परिणाम भी सामने आ गया।
प्रभारी सुपरवाइजर शैलेन्द्र कुमार दवे ने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. किरण वाडिवा के मार्गदर्शन में यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।
जानकारी के अनुसार हरिसिंह पिता कन्हैयालाल लोधी (48 वर्ष), निवासी राहतगढ़, जिला सागर हुसैन टेकरी शरीफ जियारत के लिए जावरा आए हुए थे। इसी दौरान ताल नाका फंटे पर उनकी दोपहिया वाहन को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उनका कूल्हा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया।
गंभीर अवस्था में उन्हें सिविल अस्पताल लाया गया, जहां प्रभारी डॉ. दीपक पालड़िया ने तत्काल उपचार शुरू कराया। मरीज की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण अस्पताल प्रशासन ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए दवाइयों, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी निशुल्क उपलब्ध कराईं।
इसके बाद शनिवार को आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अजय सिंह राठौर के नेतृत्व में जटिल कूल्हा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया। इस टीम में डॉ. दीपक पालड़िया, डॉ. अतुल मंडवारिया, डॉ. दिनेश पाटीदार, ओटी सहायक शिरोमणि मसीह, नर्सिंग ऑफिसर भरत बिड़वान, अनिल बैरागी और गोपाल कंडारे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहने के बाद अस्पताल परिसर में खुशी का माहौल है। चिकित्सा कर्मियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि जावरा की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक नया अध्याय है।
हालांकि, इस उपलब्धि के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि जब सीमित संसाधनों वाले जावरा सिविल अस्पताल में इतनी जटिल सर्जरी संभव हो सकती है, तो प्रदेश के कई अन्य सरकारी अस्पतालों में अब भी मरीजों को रेफर क्यों किया जाता है? क्या वहां इच्छाशक्ति की कमी है या संसाधनों के बेहतर उपयोग का अभाव?
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होता रहा तो आने वाले समय में जावरा केवल विधानसभा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र के लिए एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र बन सकता है।
इस ऐतिहासिक सफलता पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए चिकित्सा दल को बधाई दी है।
